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कब है साल का पहला प्रदोष व्रत? पूजा विधि, मुहूर्त और क्या है इस व्रत का महत्व, जानिए

माना जाता है कि शाप के कारण चंद्रदेव को क्षय रोग हो गया था। इससे मुक्ति पाने के लिए चंद्रदेव ने हर माह में आने वाली त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव के लिए प्रदोष का व्रत रखना शुरू किया।

साल का पहला प्रदोष व्रत कब है? जानें पूजा विधि और अन्य जरूरी बातें

Pradosh Vrat in January 2021: दिन के अनुसार आने वाले प्रदोष व्रत का महत्व भी अलग होता है, रविवार के प्रदोष व्रत से आयु वृद्धि तथा अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त होता है

कब है साल का आखिरी प्रदोष व्रत, जानिए पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त

Pradosh Vrat: माना जाता है कि प्रदोष व्रत करने वाले व्यक्ति को रोगों का भय नहीं रहता है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है।

भगवान शिव को समर्पित हैं प्रदोष व्रत, जानिए व्रत कथा और आरती

Pradosh Vrat Katha: प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस बार प्रदोष व्रत शनिवार को है इसलिए इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। बताया जाता है कि शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के साथ ही शनिदेव की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

कब है दिसंबर का पहला प्रदोष व्रत, जानिए पूजन विधि, शुभ मुहूर्त और मंत्र

Pradosh Vrat Kab Hai: ऐसी मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। जानकारों का मानना है कि जो लोग प्रदोष व्रत रखते हैं, उन्हें कभी कोई रोग-दोष नहीं सताता है।

कब है अगला प्रदोष व्रत, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व

Pradosh Vrat: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि प्रदोष व्रत किया जाएगा। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक इस बार प्रदोष व्रत 27 नवंबर, शुक्रवार को किया जाएगा।

कब है अगला प्रदोष व्रत, जानें महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Pradosh Vrat Puja Vidhi: हिंदू पंचांग के मुताबिक हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया जाता है। इस व्रत को प्रदोष व्रत कहते हैं।

प्रदोष व्रत के दिन इस विधि से करें प्रदोष स्तोत्र का पाठ, संकटों से मुक्ति मिलने की है मान्यता

Shiv Pradosh Vrat: मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन जो व्यक्ति स्कंद पुराण में वर्णित प्रदोष स्तोत्र का पाठ करता है उनके सभी संकटों का नाश होता है।

Pradosh Vrat : प्रदोष व्रत में किया जाता है इस कथा का पाठ, जानिए कारण

Pradosh Vrat Katha: मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए जो व्यक्ति प्रदोष व्रत कथा पढ़ता या सुनता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

कब है अधिक मास का आखिरी प्रदोष व्रत, शुभ मुहूर्त में इस विधि से पूजा करने से भोलेनाथ के प्रसन्न होने की है मान्यता

ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक इस बार 14 अक्तूबर, बुधवार को प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) रखा जाएगा। यह व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

कल है भौम प्रदोष व्रत, जानिये कथा और आरती

Pradosh Vrat September 2020 : प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की आराधना की जाती है। यह व्रत महीने में दो बार रखा जाता है। शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है।

प्रदोष व्रत के दिन करें इस विधि से पूजा, जानिये व्रत का महत्व और शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत 29 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। मंगलवार के दिन व्रत होने से इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। साथ ही इस बार यह व्रत अधिक मास में आया है इसलिए इसे अधिक प्रदोष व्रत कहा जा रहा है।

कब है अगला प्रदोष व्रत, जानिये महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Pradosh Vrat : यह व्रत 29 सितंबर, मंगलवार के दिन रखा जाएगा। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत होने की वजह से इस व्रत को भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ भगवान हनुमान की पूजा और अधिक फलदायी मानी गई है।

भौम प्रदोष व्रत के प्रभाव से मिलती है मंगल दोष से मुक्ति, जानिये शुभ मुहूर्त, कथा और आरती

कहते हैं कि भौम प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव के साथ-साथ हनुमान जी की भी कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि भौम प्रदोष व्रत रखने से मंगल ग्रह के प्रकोप से मुक्ति मिलती है।

प्रदोष व्रत के दिन इस पाठ से प्रसन्न होते हैं शिव, सुख-सौभाग्य का वरदान मिलने की है मान्यता

मान्यता है कि जो व्यक्ति शिव प्रदोष व्रत (Shiv Pradosh Vrat) सच्चे मन से रखता है भगवान शिव स्वयं उसकी रक्षा करते हैं। यह व्रत शिव कृपा पाने के लिए अद्भुत माना गया है।

जानिये कब है अगला प्रदोष व्रत, इस विधि से करें पूजन

भगवान शिव की कृपा से सभी मनोरथ पूरे होते हैं। यह व्रत बहुत प्रभावशाली है। पुराणों में भी शिव प्रदोष व्रत की महिमा गाई गई हैं।

प्रदोष व्रत के दिन कीजिए भगवान शिव के इस अष्टक का पाठ, मनोकामनाएं पूरी होने की है मान्यता

प्रदोष का अर्थ है रात्रि की सुबह आरम्भ होना। इस प्रदोष व्रत के पूजन का विधान प्रदोष काल में ही होता है। इसलिए इसे प्रदोष व्रत कहते हैं। प्रदोष व्रत संतान की कामना और कर्ज मुक्ति के लिए किया जाता है।

रवि प्रदोष व्रत कल, जानिये इस दिन कैसे पूजा करने से बनी रहेगी भगवान सूर्य देव की कृपा

Pradosh Vrat in August 2020: ज्योतिषियों के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर है उन्हें अवश्य ये व्रत रखना चाहिए

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