बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का ऐलान होने से पहले बुधवार को बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने पश्चिम बंगाल में अपनी राज्य की कमेटी का गठन किया है। राज्य कमेटी का गठन लंबे वक्त से नहीं हुआ था।

बीजेपी ने पुराने नेताओं को साथ लेकर चलने और गुटबाजी पर लगाम लगाने की कोशिश की है।

पिछले साल जुलाई में समिक भट्टाचार्य के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के लगभग छह महीने बाद 35 सदस्यीय कमेटी की घोषणा की गई है। हालांकि नेतृत्व ने शुरू में दुर्गा पूजा से पहले टीम को मैदान में उतारने की योजना बनाई थी लेकिन पार्टी के पुराने नेताओं और 2019 के बाद शामिल हुए लोगों के बीच लगातार टकराव के कारण यह प्रक्रिया बार-बार टलती रही।

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कमेटी में वरिष्ठ नेताओं का वर्चस्व है, लेकिन कुछ नेताओं को शामिल करने और बाहर रखने के फैसले से संकेत मिलता है कि 2026 के चुनाव से पहले गुटबाजी को शांत करने का प्रयास किया गया है।

दिलीप घोष कमेटी से बाहर

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को प्रदेश कमेटी से बाहर रखा गया है जबकि केंद्रीय नेतृत्व ने हाल ही में वरिष्ठ नेताओं से राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने का आग्रह किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में एक यात्रा के दौरान दिलीप घोष से सक्रियता बढ़ाने के लिए कहा था।

सूत्रों के अनुसार, विधानसभा चुनाव में संभावित उम्मीदवार माने जाने वाले कई वरिष्ठ नेताओं को जानबूझकर कमेटी से बाहर रखा गया है ताकि चुनाव प्रचार के दौरान व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से अंजाम दिया जा सके।

सौमित्र खान को बनाया महासचिव

इस फेरबदल से सबसे ज्यादा लाभ बिष्णुपुर के सांसद सौमित्र खान को मिला। सौमित्र खान को महासचिव बनाया गया है। उनके साथ लॉकेट चटर्जी और लोकसभा सदस्य ज्योतिर्मय सिंह महतो जैसे नेताओं की भी वापसी हुई है।

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