जम्मू कश्मीर पुलिस ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन द्वारा गिराए जा रहे हथियारों और विस्फोटकों को ले जाने में शामिल आतंकियों की गिरफ्तारी की है। साथ ही जम्मू कश्मीर पुलिस ने दावा किया कि यह आतंकी माड्यूल यूरोप से ऑपरेट किया जा रहा था।

जम्मू कश्मीर पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि 27 और 28 अक्टूबर को आर एस पुरा सेक्टर के बासपुर बांग्ला क्षेत्र में एक ड्रोन की संदिग्ध गतिविधि देखी गई थी। इसके बाद अगल-बगल के सभी पुलिस स्टेशनों के साथ जानकारी साझा की गई और टीम सर्च ऑपरेशन में जुट गई।

जम्मू कश्मीर पुलिस ने इस दौरान कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया और उनके पूछताछ करनी शुरू की। पूछताछ करने पर डोडा निवासी चंद्र बोस ने कुछ अहम बातें बताई। चंद्र बोस की गतिविधि पहले ही संदिग्ध थी और वह पुलिस के सवालों का भी सही जवाब नहीं दे पा रहा था।

पुलिस की पूछताछ में चंद्र बोस ने बताया कि वह जम्मू कश्मीर के गोले गुजराल के रहने वाले शमशेर सिंह के इशारे पर काम कर रहा था। यह ओजीडब्ल्यू नामक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन के लिए काम कर रहा था।

घटनास्थल और सामान्य क्षेत्र की ओर जाने वाले रास्तों के सीसीटीवी फुटेज की गहनता से जांच की गई। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपी बलविंदर निवासी जम्मू (अब यूरोप में बसे) नामक एक ओजीडब्ल्यू के संपर्क में थे। बलविंदर आतंकी संगठन के लिए ओजीडब्ल्यू का काम करता है और वह पाकिस्तान से हथियार भेजने वालों के संपर्क में था। हालांकि अभी पुलिस शमशेर और चंद्र बोस से पूछताछ कर रही है।

बता दें कि रविवार को जम्मू-कश्मीर के सांबा में रामगढ़ इलाके में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देर रात एक पाकिस्तानी ड्रोन भारतीय सीमा में देखा गया था। इसके बाद सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक देर रात एक पाकिस्तानी ड्रोन रामगढ़ सेक्टर में भारतीय क्षेत्र के भीतर कुछ मिनट तक रहा और फिर वापस पाकिस्तान की ओर निकल गया।