क्या नीतीश कुमार फिर असहज महसूस कर रहे हैं। भाजपा से गठबंधन तो कर लिया और मनमाफिक व ज्यादा सीटें भी लेने में सफल रहे पर चुनाव प्रचार में वैसा तालमेल नहीं दिखा पा रहे जिसकी उम्मीद थी। उधर उनके धुरविरोधी मुंहबोले भतीजे तेजस्वी यादव ने तंज कसने की कोई कसर नहीं छोड़ी है। दरअसल जनता दल (एकी) इस बार अपना चुनाव घोषणा पत्र जारी नहीं कर पाया। कायदे से तो राजग को न्यूनतम साझा कार्यक्रम घोषित करना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हां, भाजपा ने अपना संकल्प पत्र जरूर वक्त रहते जारी कर दिया। फिर जद (एकी) के सामने क्या दुविधा है कि उसका घोषणा पत्र तैयार हो जाने के दावों के बावजूद जारी नहीं हो पाया। इस दुविधा का खुलासा भी अपने अंदाज से तेजस्वी ही कर रहे हैं। उनका तर्क है कि भाजपा के दबाव में हैं उनके पलटू चाचा।
धारा 370, समान नागरिक संहिता और राम मंदिर के मुद्दे पर वे भाजपा से सहमति नहीं जताना चाहते। इसके विपरीत कुछ कहें, इसे भाजपा सहन नहीं करेगी। लिहाजा घोषणा पत्र जारी हो ही नहीं पाया। तेजस्वी तो नीतीश कुमार से सवाल भी कर रहे हैं कि उन्होंने राजग में वापस जाकर भी बिहार के लिए विशेष पैकेज की पुरानी मांग पर चुप्पी क्यों साध रखी है। भाजपा और जद (एकी) के रिश्तों की असहजता का संकेत खुद नीतीश ने भी दे दिया। एक चुनावी सभा में जब प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे लगाए और लोगों से लगवाए तो नीतीश मंच पर चुपचाप बैठे रहे। नारे लगाना तो दूर वे खड़े भी नहीं हुए। जबकि भाजपा नेताओं समेत राम विलास पासवान तक ने प्रधानमंत्री के सुर में सुर मिलाते हुए नारे लगाए।
तल्खी बेमिसाल
पश्चिम बंगाल में अब घमासान तृणमूल कांग्रेस के विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त के मुद्दे को लेकर मचा है। शुरुआत खुद प्रधानमंत्री ने चुनावी सभाओं में की। फरमाया कि दीदी यानी ममता बनर्जी के चालीस विधायक उनके संपर्क में हैं। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद दीदी और उनकी पार्टी ने चुनाव आयोग से शिकायत कर उनकी वाराणसी से उम्मीदवारी को रद्द करने की मांग की है। प्रधानमंत्री ने हुगली की चुनावी रैली में कहा था कि लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद दीदी के चालीस विधायक तृणमूल कांग्रेस से नाता तोड़ लेंगे।
23 मई के बाद हर जगह भाजपा ही आएगी नजर। प्रधानमंत्री ने ममता पर इन विधायकों के साथ विश्वासघात करने का भी आरोप लगाया था। इसके बाद तो ममता बनर्जी हाथ धोकर पीछे पड़ गई हैं। उनकी पार्टी ने दिल्ली में चुनाव आयोग को शिकायत भेजने में देर नहीं लगाई। प्रधानमंत्री के बयान को चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन भी बता दिया। चुनावी रैली में पलटवार करने से भी नहीं चूकीं। जवाब हुगली जिले की अपनी रैली में ही दिया। बेशर्मी से विधायकों की खरीद-फरोख्त पर उतारू होने का आरोप भी जड़ दिया। फिर नसीहत के अंदाज में बोलीं कि आमतौर पर लोग राष्ट्रीय नेताओं का सम्मान करते हैं पर वे अपवाद ठहरे।

