संसद में 1996 में दिए अपने ऐतिहासिक भाषण में सुषमा स्वराज ने भारतीयता का मतलब समझाया था। मंगलवार (6 अगस्त) को उनके निधन पर एक बार फिर हर भारतीय के सामने उस भाषण की पंक्तियां जीवंत हो गई है। सुषमा ने उस भाषण में कहा था, ‘विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मेरी आंखें उस वक्त भर आईं जब भारतीयता शब्द पर ही सवाल उठा दिए गए।’ सुषमा ने यह बयान डीएमके नेता मुरासोली मारन के एक बयान पर दिया था।

चंद्रशेखर से पूछा था- आप क्यों नहीं बोलते? सुषमा ने कहा था, ‘मैं मुरासोली मारने की इज्जत करती हूं लेकिन आज उन्होंने कहा कि वो अलग हैं और हम अलग हैं, किस तरह की भारतीय संस्कृति की आप बात कर रहे हैं? भारत, भारतीय और भारतीयता क्या है? मुझे लगा था कि यहां बैठा कोई शख्स इस पर कुछ जरूर कहेगा। मुझे चंद्र शेखर जी से उम्मीद थी। चंद्र शेखर जी कौरवों के इस सदन में भीष्म पितामह हैं। आप भी चुप हैं? आप कुछ क्यों नहीं बोलते?’

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फिर यूं समझाया भारतीयता का मतलबः सुषमा ने कहा, ‘मुरासोली जी मैं आपको बहुत सम्मान के साथ कहना चाहती हूं कि भारतीयता का अर्थ समझने के लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है। भांगड़ा से भरतनाट्यम तक सभी नृत्य भारत के हैं। भारतीयता का मतलब जम्मू के राजमा चावल और पंजाब की मक्का रोटी से दक्षिण के इडली डोसा तक है। अमरनाथ से रामेश्वरम तक सभी श्रद्धालु भारत के हैं। भगवान शिव के भक्त अमरनाथ से जल ले जाते हैं और रामेश्वरम में भगवान के चरण धोते हैं। पश्चिम बंगाल में जन्म लेने के बावजूद एनसी चटर्जी ने अपने बेटे का नाम सोमनाथ रखा। यही हमारी संस्कृति है। संस्कृति का मतलब समझने के लिए मुझे किसी डिक्शनरी की जरूरत नहीं है। यह इसी सदन में दिखती है।’

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