मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री रहीं सुषमा स्वराज विदेशों में मुश्किल में फंसे लोगों के लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं थीं। उन्होंने कड़ी जद्दोजहद कर मदद की कई ऐसी मिसालें पेश कीं। ऐसा ही एक वाकया मूक बधिर गीता की पाकिस्तान से घर वापसी का भी है। सुषमा स्वराज न सिर्फ गीता को भारत लाईं, बल्कि एक मां की तरह उसका ध्यान रखा और उसे खुश रखने के लिए हरसंभव कदम भी उठाए। हालांकि चार साल की कोशिशों के बावजूद गीता से जुड़ा एक बड़ा काम बाकी रह गया।
तमाम मुश्किलों के बावजूद उठाया गीता की वापसी का बीड़ाः करीब चार साल पहले 2015 में विदेश मंत्रालय को पाकिस्तान में रह रही एक भारतीय बच्ची के बारे में जानकारी मिली। साथ ही यह भी पता चला कि बच्ची कई सालों पहले गलती से पाकिस्तान चली गई थी, हालांकि गीता बोलने में सक्षम नहीं है ऐसे में उस वक्त उसके माता-पिता को लेकर कई जानकारी नहीं मिल पा रही थी। गीता की वापसी उतनी मुश्किल नहीं थी जितना पता लगाना कि उसके मां-बाप कौन हैं। तमाम मुश्किलों के बावजूद सुषमा स्वराज ने बतौर विदेश मंत्री यह बीड़ा उठाया और वे गीता को भारत लेकर आईं। अभी भी गीता के माता-पिता की तलाश जारी है।
अभी भी जारी है मां-बाप की तलाशः गीता की भारत वापसी के बाद भी उसके असली मां-बाप का पता नहीं चल सका। विदेश मंत्री रहते हुए एक बार सुषमा स्वराज ने कहा था कि जब भी गीता से मुलाकात होती है वह अपने मां-बाप से मिलने के लिए कहती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘गीता के असली मां-बाप सामने आएं मैं उसे बोझ नहीं बनने दूंगी।’
