दो साल पहले पाकिस्तान से लौटकर आई जिस महिला को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ‘भारत की बेटी’ कहा था, वह अब अपने संघर्षों को दिशा देकर नई जिंदगी शुरू करने जा रही है। उज्मा अहमद पर एक फिल्म भी बनने जा रही है। प्यार, धोखे और प्रताड़ना के बाद अब सफलता की दिशा में बढ़ी उज्मा की जिंदगी किसी दर्दनाक सपने की तरह थी। प्यार में मिले धोखे के चलते वे पाकिस्तान चली गई थीं, जहां से जैसे-तैसे भागकर निकली और अब दिल्ली में उन्होंने ब्यूटी पार्लर खोल लिया है। उज्मा ने खुद को बचाने के लिए सुषमा स्वराज को धन्यवाद दिया और कहा कि उन्हें भगवान ने मेरे लिए भेजा है। पढ़िए उज्मा की पूरी कहानी…

बेटी के नाम पर खोला ब्यूटी पार्लरः दो साल तक अपनी हालत से उभरने की कोशिशों के बाद उज्मा ने अब तय किया है कि वे अपने दर्द को सफलता की कहानी में तब्दील करेंगी। पहले कदम के तौर पर उन्होंने दिल्ली के सीलमपुर इलाके में एक ब्यूटी पार्लर खोला है। अपनी छोटी बेटी फलक के नाम से उन्होंने बुधवार (10 अप्रैल) को उन्होंने इस पार्लर की शुरुआत की। उनके साथ इस पार्लर में दो महिलाएं काम करेंगी जो खुद भी उत्पीड़न की शिकार हो चुकी हैं। मीडिया से बातचीत में उज्मा ने कहा, ‘यह छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम है। हर दिन डर-डरकर जीने से मेरी जिंदगी खराब हो गई। अब मुझे अपनी बेटियों के लिए आगे बढ़ना होगा। अब मैं पीछे मुड़कर नहीं देखने वाली।’

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की मौजूदगी में परिजनों से मिलतीं उज्मा अहमद (फोटोः पीटीआई)

क्या हुआ था उज्मा के साथः रिपोर्ट के मुताबिक उज्मा ने कहा, ‘मैं बिजनेस स्टडीज के लिए मलेशिया गई थी। इस दौरान मुझे पहले पति से दो बच्चे हुए। इसके बाद मुझे मलेशिया में पाकिस्तान के रहने वाले ताहिर अली से प्यार हो गया। उसने मुझे प्यार करने का भरोसा दिलाया लेकिन इसके पीछे एक साजिश थी। ताहिर ने कहा कि उसका गांव बेहद सुंदर है। मुझे उस पर पूरा भरोसा हो गया और गूगल पर उसके गांव का नाम तक डाले बिना मैं उसके साथ पाकिस्तान चली गई। जब वहां गई तो सबकुछ गड़बड़ था। अजीबोगरीब घर बने थे और वैसे ही लोग थे। ऐसी जगह थी जहां कोई पाकिस्तानी भी जाने से पहले दो बार सोचेगा। वहां मुझे पता चला कि ताहिर पहले से शादीशुदा है और उसके चार बच्चे हैं। मैंने वहां से भागने की कोशिश की लेकिन पकड़ी गई। अली ने मुझे प्रताड़ित किया। बाद में मुझे बंदूक की नोक पर शादी के लिए मजबूर किया गया। आखिरकार लंबी जद्दोजहद के बाद एक दिन मुझे वहां से निकलने में कामयाबी मिली। मैं जैसे-तैसे भारतीय उच्चायोग पहुंची।’

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इसके बाद कानूनी मामले सुलझाए गए और उज्मा को भारत लाया गया। वे खुद को बचाने का पूरा श्रेय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को देते हुए कहती हैं, ‘ईश्वर ने उन्हें मेरे लिए भेजा। उन्होंने मुझे भारत की बेटी कहा और भरोसा दिलाया कि अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर आज मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं तो उनके भावनात्मक साथ की वजह से ही खड़ी हूं।’ उज्मा पर जल्द ही एक फिल्म भी बनने जा रही है। चुनाव तक यह फिल्म अटकी है, चुनाव होने के बाद फिर काम शुरू होगा।

 

उज्मा कहती हैं, ’14 सालों से मैं अपने परिवार से दूर हूं। मेरे पिता एनआरआई हैं और विदेश में रहते हैं। जब से मैं गई थी तबसे मेरी उनसे कोई बातचीत नहीं हुई। मैंने हमेशा अपनी लड़ाई खुद लड़ी लेकिन अकेलेपन ने मुझे परेशान कर दिया।’ पाकिस्तान की कैद से आजाद होकर दिल्ली में ब्यूटी पार्लर खोलने वाली उज्मा अब अपनी थैलासिमिया पीड़ित बच्ची के इलाज के लिए पैसे जुटा रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि पार्लर से उन्हें फंड जुटाने में मदद मिलेगी।