राजधानी दिल्ली में हो रहे सीलिंग विवाद में अब आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच तकरार पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी के सामने नई मुश्किलें खड़ी होती दिख रही हैं। दिल्ली बीजेपी के नेताओं ने कुछ आप विधायकों के खिलाफ पुलिस में शिकायत की है। बीजेपी ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने सीलिंग के मामले पर ठीक से बात नहीं की और उनके गुंडों ने मारपीट की। बीजेपी की ओर से कहा गया कि जब मनोज तिवारी के नेतृत्व में बीजेपी नेताओं की टीम केजरीवाल से मिलने पहुंची तब उनके गुंडों ने पूरी टीम के ऊपर हमला कर दिया। इसी मामले पर बीजेपी ने केजरीवाल के खिलाफ पुलिस से शिकायत की। बीजेपी ने ट्वीट कर बताया कि सिविल लाइन पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया गया है। इसके अलावा यह भी जानकारी दी है कि बीजेपी नेता वीजेंद्र गुप्ता को पुलिस इलाज के लिए अस्पताल लेकर गई है। बीजेपी ने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘केजरीवाल सरकार खुलेआम गुंडागर्दी पर उतर आई है। शांतिपूर्ण तरीक़े से वार्ता करने गए भाजपा नेताओं पर हमला पूरे लोकतंत्र पर हमला है।’

दरअसल, मंगलवार को बीजेपी सांसद और प्रतिनिधियों ने सीएम केजरीवाल से सीलिंग के मामले पर चर्चा करने के लिए मुलाकात की थी, लेकिन मुलाकात पूरी नहीं हो सकी और बीजेपी सांसद मीटिंग को बीच में ही छोडड़कर बाहर निकल आए, जिसके बाद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। दिल्ली सीएम ने आरोप लगाया कि वह सीलिंग के मामले पर बीजेपी सांसदों से खुलकर बात करना चाहते थे, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई और बीजेपी सांसद, मेयर और विधायक मुलाकात को बीच में ही छोड़कर चले गए। आप ने आरोप लगाया कि बीजेपी सीलिंग बंद कराने को लेकर सीरियस नहीं है। आप ने कहा, ‘केजरीवाल के घर पर बीजेपी नेताओं की मीटिंग में बीजेपी सांसद इस मामले पर बैठकर और खुलकर बात करने को तैयार नहीं हुए, उन्होंने केवल हंगामा खड़ा किया और वहां से चले गए।’

मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए केजरीवाल ने कहा कि जब उनके पास बीजेपी की ओर से चिट्ठी आई कि वह सीलिंग के मामले में मिलना चाहते हैं तो उन्हें खुशी हुई कि इस मामले का मिलकर हल निकाला जाएगा, लेकिन वे लोग बंद कमरे में बात करना चाहते थे। केजरीवाल ने कहा, ‘मैं खुलकर बात करने की बात कहता रहा, लेकिन उन्होंने मेरी एक नहीं सुनी।’ साथ ही सीएम केजरीवाल ने ऐलान किया कि सीलिंग पर रोक लगाने के लिए वह केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने की मांग करेंगे और इस मामले में दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाएगी।