प्रदेश शासन की ओर से निजी कोविड चिकित्सालयों में उपचार की दर निर्धारित कर दी गई हैं। कोविड के दौरान उपचार में निजी चिकित्सालयों के मनमानी शुल्क वसूली को रोकने के लिए शासन स्तर से यह कदम उठाया गया है। शहर और चिकित्सालय की श्रेणी के मुताबिक उपचार की दर निर्धारित की गई है।
सीएमओ गौतम बुद्ध नगर डा.सुनील शर्मा और गाजियाबाद सीएमओ डा.भवतोष शंखधर ने बताया कि अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद की ओर से निजी कोविड चिकित्सालयों के लिए जांच शुल्क निर्धारण वाला शासनादेश भेजा गया है। जनपद गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद ‘ए’ श्रेणी के शहरों में रखा गया है। जनपद में संचालित निजी कोविड चिकित्सालय ‘ए’ श्रेणी के लिए निर्धारित रेट के हिसाब से ही उपचार का शुल्क वसूलेंगे और यदि कोई शिकायत मिलती है तो संबंधित चिकित्सालय के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शासनादेश की प्रति जिलाधिकारियों व मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को भेजी गई है।
शासनादेश के मुताबिक ‘ए’ श्रेणी के शहरों में ‘नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फार हास्पिटल’ से मान्यता प्राप्त चिकित्सालय कोविड मरीजों को सपोर्टिव केयर, आक्सीजन और सहयोगी सुविधा के साथ एकांतवास बिस्तर उपलब्ध कराने के लिए एक दिन के अधिकतम 10 हजार रुपए ही वसूल पाएंगे। इसके साथ ही शासन ने गंभीर मरीजों के लिए आइसीयू बिस्तर के लिए अधिकतम 15 हजार रुपए प्रतिदिन और वेंटिलेटर सुविधा के साथ आइसीयू बिस्तर के लिए अधिकतम 18 हजार रुपए प्रतिदिन निर्धारित किए हैं।
शासन ने एनएबीएच से गैर मान्यता प्राप्त चिकित्सालयों के लिए भी शुल्क तय किए हैं। ‘ए’ श्रेणी वाले शहरों में ऐसे चिकित्सालय आक्सीजन और सहयोगी सुविधा के साथ एकांतवास बिस्तर के लिए अधिकतम आठ हजार रुपए, आइसीयू बिस्तर के लिए 13 हजार रुपए और वेंटिलेटर सुविधा के साथ आइसीयू बिस्तर के लिए अधिकतम 15 हजार रुपए प्रतिदिन वसूल सकेंगे। साथ ही यह भी कहा गया है कि ‘बी’ और ‘सी’ श्रेणी के शहरों में स्थित सुपर स्पेशिएलिटी चिकित्सालय उक्त दरों का क्रमश: 80 और 60 फीसद शुल्क वसूल सकेंगे। स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित कोविड चिकित्सालय के लिए यह शुल्क एक पैकेज है।
इस पैकेज में कोविड केयर प्रावधान के अनुसार उपचार प्रदान किए जाने के लिए बिस्तर, भोजन, नर्सिग केयर, निगरानी और इमेजिंग सहित अन्य आवश्यक जांच, चिकित्सक देखभाल आदि सुविधाएं सम्मिलित हैं। को-मोर्बिड रोगियों का उपचार तथा अल्प अवधि की हीमो डायलिसिस की सुविधा भी पैकेज में शामिल है। यह दर निर्धारण बच्चों के उपचार पर भी लागू है। हालांकि रेमडेसिविर, टोसिलीजूमाव व विभाग द्वारा समय-समय पर घोषित की गई अन्य दवा इस पैकेज में सम्मिलित नहीं हैं।
अस्पताल के आयुष्मान भारत योजना से आबद्ध होने की दशा में सीजेरियन प्रसव के व्यय की प्रतिपूर्ति आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों के संबंध में अस्पताल से हो सकेगी। जो अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत आबद्ध नहीं है, वह आयुष्मान की दर पर कोविड मरीजों से शुल्क वसूल सकेंगे।
एकांतवास में मरीजों को योग कराएगी दिल्ली सरकार
कोरोना संक्रमण से बढ़ते मामलों के बाद दिल्ली में घर में एकांतवास में रह रहे मरीजों की संख्या बढ़ी है। अब दिल्ली सरकार इन मरीजों का तनाव कम करने और संक्रमण से मजबूती से लड़ने के लिए मरीजों को तैयार करेगी। इसके लिए दिल्ली सरकार ने ऐसे सभी रोगियों को आनलाइन योग सिखाने का निर्णय लिया है। मंगलवार प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह जानकारी दी। दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि ऐसी सेवाएं शुरू करने वाली वह देश की पहली सरकार है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि योग और प्राणायाम करने से कोरोना से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। दिल्ली सरकार की कक्षाएं सुबह 6 से 11 बजे तक और शाम 4 से 7 बजे तक एक-एक घंटे के लिए होंगी। ऐसी दिनभर में आठ कक्षाएं होंगी। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने एक साथ 40 हजार लोग योग की कक्षाएं कराने की क्षमता तैयार की है। सरकार की योजना के मुताबिक एक कक्षा में केवल 15 मरीज ही शामिल होंगे, इसकी मदद से एकांतवास में रहकर इलाज ले रहे सभी कोरोना संक्रमित मरीज जल्द से जल्द स्वस्थ हो सकेगें। उन्होंने बताया कि इस समय दिल्ली में लगभग डेढ़ से दो हजार बिस्तर ही भरे हुए हैं, बाकी सभी मरीज एकांतवास में हैं।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि कोरोना मरीज घर बैठे योगा शिक्षक के साथ योग कर पाएंगे, इसके लिए दिल्ली सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। कोरोना से बचाव से संबंधित कौन-कौन से आसन हैं और कौन-कौन से प्राणायाम हैं। उसका विशेष प्रशिक्षण इन शिक्षकों को दिया गया है।
