उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित एसजीपीजाआई ने बुधवार रात 12 बजे अप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित 13 साल की मुस्कान को वॉर्ड से बाहर निकाल दिया। वॉर्ड से निकाले जानें के एक घंटे बाद पीड़ित बच्ची की मौत हो गई। पीड़िता के घर वालों का आरोप है कि असाध्य रोग बजट से पैसा नहीं मिलने के कारण पीजीआई प्रशासन इलाज रोक दिया था। हालांकि मुस्कान के चचेरे भाई का कहना है कि इस मामले की लिखित शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री और पीजीआई निदेशक से किया है। और इस मामले को संज्ञान में लाने के लिए ट्वीट किया है।

गौरतलब है कि बलिया निवासी मुस्कान (13) अप्लास्टिक एनीमिया बिमारी से पीड़ित थी। इस बिमारी से पीड़ित व्यक्ति को उपयुक्त मात्रा में रक्त कोशिकाएं नहीं बनती हैं। यह लाखों में से किसी एक व्यक्ति के अंदर पाई जाती है। मुस्कान का इलाज पिछले पांच महिने से पीजीआई के हीमेटॉलजी विभाग में चल रहा था। चचेरे भाई रोहित ने बताया कि डॉक्टरों ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट का इस्टिमेट बनाकर दिया। जिसके लिए असाध्य रोग बजट से 11 लाख रुपये दिए गए थे। इससे बोन मैरो ट्रांसप्लांट तो नहीं हुआ पर यह पैसा मुस्कान के इलाज में खर्च हो गया।

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स्वास्थ्य मंत्री सुरेश खन्ना ने भी नहीं की मदद: पैसा खत्म होने को बाद रोहित मदद के लिए पेशेंट वेलफेयर सोसायटी गया, जहां कर्मचारियों ने बताया कि असाध्य रोग बजट खत्म हो गया है इसलिए मरीज के लिए दोबारा जारी नहीं किया सका। जिसके बाद डॉक्टरों ने मुस्कान को डिस्चार्ज कर दिया। परिवार वालों ने डॉक्टरों से मिन्नतें कीं, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी एक न सुनी। वॉर्ड से निकाले जानें के एक घंटे बाद मुस्कान की मौत हो गई। परिवारजनों ने यूपी स्वास्थ्य मंत्री सुरेश खन्ना से इस संबंध में बात करने की कोशिश की लेकिन उनसे सम्पर्क नहीं हो सका।

बच्ची के हालत में नहीं हो रहा था सुधार : हीमेटॉलजी विभाग के डॉक्टर संजीव ने बताया कि मुस्कान के तबियत में कोई सुधार नही आ रहा था। हमने बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तैयारी की थी लेकिन बच्ची को लगातार बुखार, लिवर में अप्सेस , फंगल इंफेक्शन की दिक्कतें आ रही थीं। जिसके इलाज में मरीज के अकाउंट में पैसा खत्म हो गया था। इसकी जानकारी देने के लिए बच्ची के पिता को बुलाया गया, लेकिन वे नहीं पहुंचे।

असाध्य रोग बजट में थे 15 लाख: पेशेंट वेलफेयर सोसायटी के नोडल अफसर आरपी सिंह ने बताया कि वर्तमान में असाध्य रोग बजट में 15 लाख रुपये हैं। मुस्कान के परिजनों को पैसे न देने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि हो सकता है किसी कर्मचारी ने इसलिए उन्हें लौटा दिया हो कि पैसा काफी कम बचा है। किसी एक मरीज को सारे पैसे दे दिए तो बाकि मरीजों का इलाज रुक सकता है।

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बता दें कि, पीजीआई निदेशक प्रो. राकेश कपूर का कहना है कि अगर मरीज के अकाउंट में पैसा नहीं होगा तो इलाज करना संम्भव नहीं है। यहां नि:शुल्क नहीं किया जाता है। रोजाना कई शिकायतें आती है कि मरीज को इलाज नहीं मिलता है। ऐसे मामलों में हम कुछ नहीं कर सकते हैं।