विराट बिरहा गायक पद्मश्री हीरालाल यादव ने रविवार (12 मई) को 83 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनके निधन की जानकारी होते ही बिरहा समाज सहित पूरे काशी नगरी में शोक की लहत दौड़ गई। पद्मश्री हीरालाल लम्बे अरसे से बीमार चल रहे थे। बीते 27 अप्रैल की रात उन्हें शहर के भोजूबीर इलाके में गंभीर स्थिति में एडमिट करवाया गया था। आईसीयू में एडमिट पद्मश्री हीरालाल यादव को देखने 28 अप्रैल को मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ वीबी सिंह उन्हें देखने पहुंचे थे। हीरालाल यादव के फेफड़ों में संक्रमण था और मल्टिपल ऑर्गन फेल्योर की स्थिति बनी हुई थी। उनके निधन की जानकारी होते ही उनके चाहने वाली भीड़ उनके आवास पर अंतिम दर्शन को उमड़ने लगी है।

प्रधानमंत्री ने जाना हाल: विराट बिरहा गायक पद्मश्री हीरालाल यादव के निधन से पूर्व उनके बेटे सत्यनारायण यादव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर पद्मश्री हीरालाल का हाल जाना और उन्होंने उनकी हर सम्भव मदद करने का आश्वासन दिया। पीएम ने उनके बेटे से यह भी कहा की मेरे लिए कोई कार्य होगा तो जरूर बताइएगा।

National Hindi News, 12 May 2019 LIVE Updates: पढ़ें दिनभर की हर बड़ी खबर सिर्फ एक क्लिक में

कौन हैं हीरालाल यादव: मूलरूप से वाराणसी में हरहुआ ब्लॉक के बेलवरिया निवासी हीरालाल यादव का जन्म वर्ष 1936 में चेतगंज स्थित सरायगोवर्धन में हुआ। उनका बचपन काफी गरीबी में गुजरा, भैंस चराने के दौरान शौकिया गाते-गाते अपनी सशक्त गायकी से बिरहा को आज राष्ट्रीय फलक पर पहचान दिलाई और बिरहा सम्राट के रूप में ख्यात हुए। यह कठोर स्वर साधना का प्रतिफल तो रहा ही गुरु रम्मन दास, होरी व गाटर खलीफा जैसे गुरुओं का आशीर्वाद भी इसमें शामिल रहा। उन्होंने वर्ष 1962 से आकाशवाणी व दूरदर्शन पर बिरहा के शौकीनों को अपना दीवाना बनाया। भक्ति रस में पगे लोकगीत और कजरी पर भी श्रोताओं को खूब झुमाया, वहीं गायकी में शास्‍त्रीय पुट ने बिरहा गायन को विशेष विधा के तौर पर पहचान दिलाई है। जो आज उनको पद्मश्री सम्मान तक लेकर आयी है।

 

पद्मश्री समेत एक दर्जन सम्मान: मोदी सरकार में इसी वर्ष हीरालाल यादव को पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया था। उत्‍तर प्रदेश सरकार ने उन्हें 93-94 में संगीत नाटक अकादमी सम्मान और 2014 में यशभारती के साथ ही विश्व भोजपुरी अकादमी का भिखारी ठाकुर सम्मान व रवींद्र नाथ टैगोर सम्मान मिला है।