जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद आठ अक्तूबर को स्थानीय निकाय चुनाव के पहले चरण के मतदान को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। निकाय चुनाव से पहले आतंकी संगठनों की धमकियों और हमले की साजिश के बारे में मिल रही खुफिया जानकारियों के मद्देनजर सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने विभिन्न जिलों में त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया है। इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई है। संवेदनशील इलाकों में बैरिकेटिंग की गई है और कैमरे लगाए गए हैं। गाड़ियों की जांच और तलाशी बढ़ाई गई है। सोमवार को जम्मू और लद्दाख के अलावा संवेदनशील दक्षिण कश्मीर के चार जिलों में मतदान होगा। जहां मतदान होना है, उन इलाकों में खुफिया सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उच्च तकनीक वाले विद्युत निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रथम चरण के चुनाव के इंतजामों के मद्देनजर श्रीनगर में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें सेना, अर्द्धसैनिक बलों, जम्मू-कश्मीर पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी शामिल हुए।
मतदान के मद्देनजर सुरक्षा एजंसियों ने विशेष योजना तैयार की है। इंटरनेट सेवाओं पर रोक के अलावा सैन्य प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ाई गई है। सुरक्षा में सेना और अर्द्धसैनिक बलों को भी लगाया गया है। जम्मू, श्रीनगर, अनंतनाग, बारामुला, शोपियां और पुलवामा जिलों में पुलिस नाके लगाए गए हैं। शोपियां के विभिन्न इलाकों में सेना ने तलाशी अभियान चलाया है। पहले चरण में श्रीनगर शहर की तीन नगरपालिकाओं, कश्मीर घाटी के कुपवाड़ा, हंदवाड़ा, बांदीपोरा, बारामूला, चाडूरा, बड़गाम, खानसाहिब, अचबल, देवसर, कोकरनाग, काजीगुंड और कुलगाम नगरपालिका समितियों और लद्दाख के लेह व करगिल क्षेत्र के साथ जम्मू क्षेत्र के बिश्नाह, अरनिया, आरएस पुरा, अखनूर, खौर, जुरियन, राजौरी, थानामांडी, नौशेरा, कालाकोटा, सुंदरबनी, पुंछ और सुरनकोट की नगरपालिका समितियों के लिए सोमवार को मतदान होगा।
नेशनल कांफ्रेंस (एनसी), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), हाकिम यासीन के नेतृत्व वाले पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) और गुलाम हसन मीर की अध्यक्षता वाली डेमोक्रेटिक पार्टी नेशनलिस्ट (डीपीएन) समेत मुख्य राजनीतिक दलों ने इन चुनावों से अलग रहने का फैसला किया है। आतंकी संगठनों ने चुनाव के दौरान घाटी में बंद का आह्वान किया है। इससे पहले राज्य में 2005 में गुप्त मतदान के जरिए नगर निकाय चुनाव हुए थे और उनका पांच साल का कार्यकाल फरवरी 2010 में खत्म हो गया था। मीरवाइज उमर फारूक नजरबंद : हुर्रियत कांफ्रेंस के नरमपंथी धड़े के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक को रविवार को नजरबंद कर दिया गया। इससे पहले पुलिस ने दो अक्टूबर को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक को एहतियाती तौर पर हिरासत में ले लिया था। हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी की नजरबंदी जारी रहेगी। तीनों अलगाववादी नेताओं ने ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) के बैनर तले चुनावों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है।
चुनाव के लिए सुरक्षा बल तैयार : राजनाथ
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में हिंसा में कमी आई है और वहां नगरीय निकाय चुनाव कराने के लिए सुरक्षा बल पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने अब तक आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में सिंह ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में आगामी सोमवार को शुरू होने जा रहे चार चरणों के नगरीय निकाय चुनाव सकुशल संपन्न कराने के लिए हमारे सुरक्षा बल पूरी तरह तैयार हैं। इन चुनावों में भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर होगी।
422 वार्डों में मतदान सोमवार सुबह सात बजे शुरू होगा पहले चरण में
1283 उम्मीदवार मैदान में हैं पहले चरण में , जो जम्मू के 247 वार्ड, कश्मीर में 149 और लद्दाख के 26 वार्ड में चुनाव लड़ रहे हैं।
10 अक्तूबर को दूसरे चरण में 384 वार्ड, तीसरे चरण में 13 अक्तूबर को 207 वार्ड, और 16 अक्तूबर को आखिरी चरण में 132 वार्डों में वोट डाले जाएंगे। मतगणना 20 अक्तूबर को होगी।

