बीएमसी चुनाव में मुंह की खाने के बाद राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण पार्टी ने हैरान करने वाला कदम उठाया है। राज ठाकरे के मनसे ने कल्याण-डोंबीवली नगर निगम (KDMC) में उद्धव ठाकरे को ठेंगा दिखाते हुए उनके धुर-विरोधी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को समर्थन दिया है।

केडीएमसी में राज ठाकरे की पार्टी मनसे अपने चचरे भाई उद्धव ठाकरे की पार्टी (शिवसेना (यूबीटी) के साथ, सत्तारूढ़ महायुति (बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) का गठबंधन) के खिलाफ लड़ी थी। इस फैसले के बाद अब शिवसेना (यूबीटी) के साथ उनके गठबंधन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि सवाल यह भी है कि क्या यह कदम भाजपा में नगर निगम से बाहर रखने का यह एक प्रयास है।

चुनाव में शिंदे गुट बनी बड़ी पार्टी

जानकारी दे दें कि केडीएमसी चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। 122 सीटों में से शिवसेना (शिंदे गुट) को 53, भाजपा को 51 सीट हासिल हुई है। यहां बहुमत के लिए किसी भी पार्टी को 62 सीट चाहिए।

बुधवार को शिवसेना (शिंदे गुट) ने नवी मुंबई के कोंकण भवन में अपने पार्टी को रजिस्टर किया और कोंकण डिविजनल कमिश्नर के सामने दावा पेश किया कि वह नगर निकाय में सबसे बड़ी पार्टी है।

इस दौरान मनसे के पार्षद भी मौजूद थे। मनसे नेता राजू पाटिल ने शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे (एकनाथ शिंदे के बेटे) और नरेश मश्के से मुलाकात की। इसके बाद मनसे ने शिंदे गुट की अगुवाई वाले शिवसेना का समर्थन देने का ऐलान किया।

कितने पार्षदों का मिला समर्थन?

इस तरह पांच मनसे पार्षदों के समर्थन और शिवसेना (यूबीटी) टिकट पर चुने गए चार पार्षदों के समर्थन के दावों के साथ शिवसेना (शिंदे गुट) ने अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, हालांकि उसे अभी औपचारिक रूप से बहुमत साबित करना बाकी है।

हालांकि पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जिन चार शिवसेना (यूबीटी) पार्षदों के समर्थन का दावा किया जा रहा है, उनमें से दो पहले मनसे से ​​जुड़े थे और उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा था, जबकि बाकी दो ने शिवसेना (शिंदे गुट) से टिकट न मिलने के बाद शिवसेना (यूबीटी) के टिकट पर चुनाव लड़ा था।

भाजपा को साइडलाइन करने के सवाल पर श्रीकांत ने कही ये बात

रिपोर्टरों से बात करते हुए सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि मनसे ने विकास के लिए पार्टी को समर्थन दिया है। आगे उन्होंने कहा कि कल्याण-डोंबिवली में मेयर सत्ताधारी महायुति का ही होगा। उन्होंने कहा कि अभी तक पदों के बंटवारे पर कोई चर्चा नहीं हुई है और आखिरी फैसला सीनियर नेता लेंगे।

आगे उन्होंने स्पष्ट किया, “हमने भाजपा को साइडलाइन नहीं किया है। रविंद्र चव्हाण और एकनाथ शिंदे के बीच वार्ता की जा रही है। अगर ठाकरे सेना भी हमारे साथ जुड़ना चाहती है तो हम उसका भी स्वागत करेंगे।”

‘राज ठाकरे से मिली अनुमति’

इस पर मनसे नेता बाला नंदगांवकर ने कहा कि स्थानीय स्तर पर ऐसे गठबंधन के लिए स्थान होते हैं। पार्टी नेता राजू पाटिल ने भी इस पर सहमति दी। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा, “यह फैसला स्थानीय स्तर पर सोच-समझकर लिया गया है। इसमें कोई स्वार्थ नहीं है। सरकार के बाहर रहने से अच्छा है कि सरकार में रहकर केडीएमसी के लोगों का भला करें, हम लोगों का काम कर उनके साथ न्याय कर सकते हैं।”

मनसे नेता राजू पाटिल और संदीप देशपांडे ने कहा कि राज ठाकरे ने स्थानीय स्तर पर फैसले लेने की अनुमति दी है।

उद्धव गुट के लिए बड़ा झटका

इस घटनाक्रम के बाद शिवसेना (यूबीटी) के लिए यह करारा झटका माना जा रहा है। बता दें कि केडीएमसी चुनावों में उद्धव गुट ने 11 सीटें जीती थीं। कोंकण भवन में ग्रुप रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के दौरान, शिवसेना (यूबीटी) के 11 में से 7 पार्षद मौजूद थे, इससे तरह-तरह की अटकलें लगने लगीं। पार्टी सूत्रों ने बाद में बताया कि उनमें से दो ही शिंदे गुट के संपर्क में थे, जबकि बाकि दो मनसे में शामिल हो गए थे।

अयोग्य ठहराने की कार्रवाई शुरू

इसके जवाब में, शिवसेना (यूबीटी गुट) ने कोंकण डिविजनल कमिश्नर के पास अपना ग्रुप रजिस्टर कराया और शिंदे गुट वाली शिवसेना के साथ जाने के शक वाले दो पार्षदों के खिलाफ दलबदल नियमों का हवाला देते हुए उन्हें अयोग्य ठहराने की कार्रवाई शुरू करने के लिए एक लेटर सौंपा।

इस बीच, शिवसेना (यूबीटी) के पार्षद स्वप्निल केने और राहुल कोट मनसे में शामिल हो गए। ये दोनों पहले भी पार्टी से जुड़े थे और इनके शामिल होने से केडीएमसी में मनसे की ताकत बढ़ गई। आगे पढ़िए एकनाथ शिंदे ने जब कसा उद्धव पर तंज