एक तरफ जहां महाराष्ट्र में स्थानीय चुनावों के बीच प्रतिद्वंद्वियों के बीच भी गठबंधन देखने को मिल रहे हैं, वहीं उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता अजित पवार ने भाजपा पर तीखे शब्दों में निशाना साधकर हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के राक्षस का नाश करने की बात कही और अपने सहयोगियों को सत्ता के भूखे करार दिया।

2017 से 2022 तक पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम में भाजपा के शासन को निशाना बनाते हुए पवार ने कहा कि उनका उद्देश्य भ्रष्टाचार के राक्षस का नाश करना है। उन्होंने पिछले शुक्रवार को कहा, “वे सत्ता के भूखे हैं। खुलेआम लूट हो रही है। पुणे के पास स्थित इस नगर निकाय में उनके चाचा शरद पवार के कार्यकाल के दौरान और फिर 1991 से उनके नेतृत्व में काफी बदलाव आया लेकिन हम कभी सत्ता के भूखे नहीं हुए।” अजित पवार की पार्टी ने चुनावों के लिए एनसीपी (एसपी) के साथ गठबंधन किया है।

अजित पवार ने अपने महायुति सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा, “हमारे कार्यकाल में भी उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे लेकिन यह लोकतांत्रिक मानदंडों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार हुआ था। आज कुछ क्षेत्रों में इतना आतंक है कि उम्मीदवार नामांकन दाखिल करने से डर रहे हैं।” उपमुख्यमंत्री ने शनिवार को अपने सहयोगियों की आलोचना भी की। इसके तुरंत बाद, राज्य भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने पवार को परोक्ष रूप से चेतावनी देते हुए कहा, “अपने गिरेबान में झांको अगर हमने मुंह खोला तो उन्हें पता है इसका क्या अंजाम होगा।” चव्हाण ने आगे कहा, “हमें अजित पवार के साथ गठबंधन पर खेद है। मैंने पार्टी नेताओं को एनसीपी के साथ गठबंधन के खिलाफ चेतावनी दी थी।”

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बावनकुले ने अजित को दी संयम बरतने की सलाह

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अपने मंत्रिमंडल सहयोगी को सार्वजनिक रूप से बोलते समय सावधानी बरतने की सलाह दी क्योंकि वे सरकार में हमारे गठबंधन सहयोगी हैं। रविवार को बावनकुले ने अजित को एक बार फिर संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने जालना में पत्रकारों से कहा, “समन्वय बैठक में यह सामूहिक रूप से तय किया गया था कि गठबंधन के नेता चुनाव प्रचार के दौरान एक-दूसरे की आलोचना नहीं करेंगे। इसके बावजूद अजित पवार ने समझौते का उल्लंघन किया। उन्हें भविष्य में संयम बरतना चाहिए।”

भाजपा के लिए पवार की तीखी टिप्पणियां हैरानी भरी हैं क्योंकि सत्ता में वापसी के बाद से पार्टी को शिवसेना और एकनाथ शिंदे से निपटने में अधिक कठिनाई हो रही है। स्थानीय चुनावों से पहले, दोनों पार्टियां एक-दूसरे के स्थानीय नेताओं को अपने पाले में करने की खींचतान में उलझी हुई थीं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि शिंदे को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष अपनी बात रखने और उनसे हस्तक्षेप करने का आग्रह करने के लिए बार-बार नई दिल्ली की यात्रा करनी पड़ी।

अजित पवार के फडणवीस के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध

इसके विपरीत अजित पवार के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध हैं। पिछले हफ्ते अप्रत्याशित रूप से फडणवीस ने नगर निगम चुनावों में एनसीपी के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया। दरअसल, 2024 के विधानसभा चुनावों में शानदार जीत के बाद भाजपा राज्य भर में जमीनी स्तर पर अपना विस्तार करना चाहती है, उसका लक्ष्य भविष्य में महाराष्ट्र में किसी भी सहयोगी दल पर निर्भर न रहना है। गणित के अनुसार, 288 में से 137 विधायकों के साथ भाजपा को अपने सहयोगियों की विशेष आवश्यकता नहीं है क्योंकि वह बहुमत के लिए आवश्यक 8 विधायक छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों से ही जुटा सकती है। जमीनी स्तर पर भाजपा की मजबूत स्थिति उसके सहयोगियों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि गठबंधन में उनका प्रभाव और भी कम हो सकता है।

वहीं,एक वरिष्ठ भाजपा मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमें अजित पवार से विश्वसनीयता और साफ छवि का प्रमाण पत्र नहीं चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फडणवीस की विश्वसनीयता और छवि के बारे में तो सभी जानते हैं।” एक अन्य नेता ने नाम न छापने की शर्त पर अजित पवार को 70,000 रुपये के सिंचाई घोटाले की याद दिलाई (जिसमें उन्हें कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था) और संकेत दिया कि यह घोटाला फिर से उठाया जा सकता है।

यह स्नेह के बजाय भय से बना गठबंधन- देवेंद्र फडणवीस

वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे पर तीखा हमला करते हुए 15 जनवरी को होने वाले बीएमसी चुनावों से पहले उनके एक साथ आने पर कहा कि यह स्नेह के बजाय भय से बना गठबंधन है। भाजपा की रैली को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा, “यह प्रीति संगम (प्रेम से बना मिलन) नहीं है। यह भीती संगम (भय से बना मिलन) है।” हमलावर फडणवीस ने कहा, “किसी ने मुझे बताया कि एक कार्टूनिस्ट (राज) और एक फोटोग्राफर (उद्धव) एक साथ आ गए हैं। मैंने उनसे कहा कि भ्रम और भ्रष्टाचार एकजुट हो गए हैं।”

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