महाराष्ट्र में 15 जनवरी को बीएमसी समेत 29 नगर निगमों के लिए वोट डाले जाएंगे। अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, भाजपा और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का हिस्सा हैं। हालांकि 15 जनवरी को होने वाले चुनाव में वे 29 नगर निगमों से कुछ में अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं। चुनाव प्रचार चल रहा है और अजित पवार कई बार बीजेपी को भी निशाने पर ले लेते हैं।
ऐसे में महायुति में खटपट की खबरें भी आने लगी। इसी को देखते हुए अब महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने रविवार को उपमुख्यमंत्री अजित पवार को सलाह दी कि वे निकाय चुनाव प्रचार अभियान के दौरान सहयोगियों को निशाना न बनाएं।
अजित पवार ने क्या कहा?
अजित पवार ने शुक्रवार और शनिवार को अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुणे और पिंपरी चिंचवड के नगर निकायों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का आरोप लगाया था। इन दोनों निगमों पर 2017 से 2022 के बीच भाजपा का शासन था। अजित पवार ने पुणे के ‘पटरी से उतरे विकास’ के लिए नगर निकाय के नेतृत्व (बीजेपी की ओर इशारा करते हुए) को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने यह भी कहा था कि पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद पिंपरी-चिंचवड कर्ज में डूब गया है।
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पुणे जिले की इन दोनों नगर निकायों में हो रहे चुनाव में एनसीपी और भाजपा अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं। जालना नगर निगम चुनाव के प्रचार के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, “समन्वय बैठक में सामूहिक रूप से यह तय किया गया था कि गठबंधन के नेता प्रचार के दौरान एक-दूसरे की आलोचना नहीं करेंगे। इसके बावजूद अजित पवार ने इस सहमति का उल्लंघन किया है। उन्हें भविष्य में संयम बरतना चाहिए।”
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ने पहले ही दी थी चेतावनी
चंद्रशेखर बावनकुले ने महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के अजित पवार पर दिए गए बयानों का भी समर्थन किया। रवींद्र चव्हाण ने शनिवार को कहा था कि अगर भाजपा आरोप लगाने लगे तो इससे अजित पवार के लिए गंभीर मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने एनसीपी प्रमुख अजित पवार को आरोप लगाने से पहले आत्ममंथन करने की सलाह भी दी थी। पढ़ें BMC चुनाव में बीजेपी ने पुरुषों से ज्यादा महिलाओं पर क्यों लगाया दांव?
