बिहार में महागठबंधन की करारी हार के बाद लालू परिवार में घमासान बचा हुआ है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने संजय यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस बीच बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने रोहिणी आचार्य के आरोपों को लेकर गुरुवार को तेजस्वी यादव पर निशाना साधा। राजद के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे और 2014 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुए राम कृपाल यादव ने नई नीतीश कुमार सरकार में मंत्री पद की शपथ लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत की।

तेजस्वी पर राम कृपाल यादव ने साधा निशाना

दानापुर से विधायक राम कृपाल यादव ने कहा, “उन्होंने (तेजस्वी यादव) महिलाओं को ‘माई-बहन योजना’ का लालच देकर रिझाने की कोशिश की, लेकिन किसी ने उन पर विश्वास नहीं किया। मतदाताओं ने समझ लिया कि वह किस प्रकार के व्यक्ति हैं। मैं परिवारिक मामलों पर बोलना नहीं चाहता, लेकिन जो व्यक्ति अपनी बहन से ही बुरा व्यवहार करता है, उसे महिलाओं के सशक्तीकरण पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है।”

चुनाव परिणाम आने के अगले दिन रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया था कि पार्टी की हार पर जवाबदेही तय करने की मांग करने पर तेजस्वी और उनके दो करीबी सहयोगियों ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। रोहिणी आचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अपने पिता लालू प्रसाद को किडनी देने की एवज में करोड़ों रुपए और टिकट की मांग करने का ताना मारा गया। रोहिणी ने यह भी दावा किया था कि जब उन्होंने अपने छोटे भाई और उसके दो सहयोगियों की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए तो उन पर चप्पल तक उठाई गई।

‘पार्टी देखूं या परिवार?’ कहकर भावुक हुए तेजस्वी यादव; लालू ने संभाला मोर्चा

तेजस्वी के वादे पर क्या बोले राम कृपाल?

राम कृपाल यादव ने तेजस्वी के उस वादे का भी मजाक उड़ाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलेगी। मंत्री राम कृपाल यादव ने अप्रत्यक्ष रूप से ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले का जिक्र करते हुए कहा, “इरादा शायद नौकरी देने के नाम पर रिश्वत मांगने का रहा होगा, लेकिन जनता ने उन्हें मौका नहीं दिया।”

लोकसभा चुनाव में मीसा भारती से पाटलिपुत्र सीट हारने के एक साल बाद विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कर मंत्री पद की शपथ लेने वाले राम कृपाल यादव ने कहा कि उन्हें संसद के दोनों सदनों और राज्य विधानसभा, तीनों में सदस्य रहने का सम्मान मिला है। उन्होंने कहा, “मैंने राजनीतिक सफर पटना नगर निगम के सदस्य के रूप में शुरू किया था और आज भी शहर के हर फेरी वाले और रिक्शा चालक के लिए उतना ही सुलभ हूं। मेरी पार्टी ने मुझे नई जिम्मेदारी दी है और मैं इसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा।” राम कृपाल यादव ने कई बार पटना लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया है, जिसे 2008 के परिसीमन के बाद पटना साहिब और पाटलिपुत्र में विभाजित कर दिया गया था।