Jammu- Kashmir Article 35A and 370: गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में संकल्प पेश करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 के सभी खंड जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होंगे। जिसके बाद आईपीसी की धाराएं अब यहां भी लागू हो सकती हैं। आपको बता दें कि इससे पहले जम्मू कश्मीर में भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह रणबीर दंड संहिता का प्रयोग होता था। बता दें कि संकल्प पेश करते हुए शाह ने कहा कि 1950 और 1960 के दशकों में तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने इसी तरीके से अनुच्छेद 370 में संशोधन किया था। हमने भी यही तरीका अपनाया है। आइये जानते हैं क्या है रणबीर दंड संहिता ?
क्या है रणबीर आचार संहिता: बता दें कि देश के कानूनी मामलों में कोर्ट में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत कार्रवाई की जाती हैं। लेकिन अनुच्छेद 370 के चलते जम्मू कश्मीर में आईपीसी नहीं लागू थी। वहां IPC की जगह रणबीर दंड संहिता ब्रिटिश काल से लागू थी, जिसे रणबीर आचार संहिता भी कहा जाता था। इसके पीछे के इतिहास में जाएं तो कहा जाता है कि आजादी से पहले जम्मू कश्मीर जो कि एक स्वतंत्र रियासत थी उसपर डोगरा राजवंश का शासन था। जिसके महाराजा रणबीर सिंह थे। बताया जाता है कि जम्मू-कश्मीर में 1932 में महाराजा के नाम पर ही रणबीर दंड संहिता लागू की गई थी।
National Hindi News, 05 August 2019 LIVE Updates: देश-दुनिया की हर खबर पढ़ने के लिए यहां करें क्लिक
मोदी सरकार ने किया यह काम: बता दें कि सरकार की ओर से गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक संकल्प पेश किया जिसमें जम्मू-कश्मीर राज्य से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन, जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के दो केंद्र शासित क्षेत्रों के रूप में करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू कश्मीर सरकार से संबंधित संविधान (जम्मू कश्मीर में लागू) आदेश 2019 जारी किया जो राज्य में भारत का संविधान लागू करने का प्रावधान करता है।

