मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कार पर शुक्रवार को नरेला में कथित तौर पर हमला किया गया। हालांकि, केजरीवाल को चोटें नहीं पहुंची। दिल्ली सरकार का आरोप है कि यह हमला स्थानीय भाजपा नेताओं के कहने पर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने किया था। साथ ही सरकार ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रही है और मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर कोताही बरत रही है। यही कारण है कि बीते तीन साल में केजरीवाल पर पांच बार हमले हो चुके हैं। इस बार जो हमला हुआ वह दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों की मौजूदगी में किया गया था। दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त प्रवक्ता अनिल मित्तल ने कहा कि न तो मुख्यमंत्री की कार पर हमला किया गया और न ही अरविंद केजरीवाल पर। आम आदमी पार्टी के स्थानीय विधायक शरद कुमार ने नरेला के एक स्कूल में कार्यक्रम आयोजित किया था। इसी कार्यक्रम में शामिल होने केजरीवाल नरेला गए थे। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। बाद में पुलिस सुरक्षा में वे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और कार्यक्रम खत्म समाप्त होने के बाद अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए। इस दौरान किसी तरह का कोई हमला नहीं हुआ।
हालांकि, प्रवक्ता ने यह भी बताया कि इस दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने केजरीवाल को कुछ समय के लिए सड़क पर रोक लिया था और विकास कार्यों की उपेक्षा बात कहकर मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। जब मुख्यमंत्री की कार रेलवे क्रांसिंग के पास कुछ समय के लिए धीमी हुई थी तो कार्यकर्ता उनके काफिले के सामने आ गए थे। प्रवक्ता ने बताया कि शुक्रवार शाम तक सरकार की ओर से कोई भी शिकायत दिल्ली पुलिस को नहीं मिली।
वहीं, नरेला के पूर्व विधायक और भाजपा नेता नीलदमन खत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार मुख्यमंत्री पर हमले की झूठी खबर फैला रही है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने विकास कार्यों में हो रही देरी को लेकर केजरीवाल के काफिले का घेराव किया था और चौथे फेज के तहत मेट्रो के विस्तार की मांग को लेकर उनसे मिलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन केजरीवाल लोगों की समस्या सुनने को तैयार नहीं थे। इस कारण कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को उनके काफिले को रोका, जब वे स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे।

