कोरोना संकट के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी केंद्र सरकार पर लगातार आक्रामक रुख बनाए हुए हैं। रविवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की रिहाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
राहुल ने कहा कि केंद्र सरकार को महबूबा मुफ्ती को जल्द रिहा करना चाहिए। अपने ट्वीट में राहुल गांधी ने कहा कि भारत सरकार की तरफ से राजनीतिक नेताओं को गैरकानूनी ढंग से हिरासत में लिए जाने से भारत के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा है। यह पहली बार नहीं है जब राहुल ने जम्मू-कश्मीर में राजनेताओं को गैरकानूनी ढंग से हिरासत में रखने जाने की बात कही है। मालूम हो कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने दो दिन पहले ही महबूबा मुफ्ती की नजरबंदी की अवधि को तीन महीने के लिए बढ़ा दिया था।
प्रशासन की तरफ से यह कदम सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिश पर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत उठाया गया। इससे पहले 26 फरवरी को पीडीपी अध्यक्ष की हिरासत की अवधि को तीन महीने के लिए बढ़ाया गया था। दो दिन पहले ही राहुल गांधी ने कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज को लेकर भी इस आशय की बात कही थी।
India’s democracy is damaged when GOI illegally detains political leaders.
It’s high time Mehbooba Mufti is released.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) August 2, 2020
दरअसल जम्मू कश्मीर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज की आवाजाही पर कोई पाबंदी नहीं है। इसके उलट सैफुद्दीन सोज उस दिन सैफुद्दीन सोज अपने घर में नजरबंद थे।
अपने निवास की दीवार के पीछे से कुछ देर के लिए मीडिया से बातचीत करते हुए सोज ने कहा कि शीर्ष अदालत में जम्मू कश्मीर प्रशासन द्वारा ‘झूठ’ बोले जाने को लेकर वह फिर अदालत की ओर रुख करेंगे। इन सब के बीच राहुल गांधी ने यह कहते हुए सोज की तत्काल रिहाई की मांग की थी कि राजनीतिक नेताओं को ‘अवैध रूप से बंदी’ बनाने से देश के ताने-बाने को नुकसान पहुंचता है।
उन्होंने ट्वीट किया, ‘बिना किसी ठोस आधार के राजनीतिक नेताओं को अवैध रूप से बंदी बनाने से देश के ताने-बाने को नुकसान पहुंचता है।’ मालूम हो कि पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से प्रशासन की तरफ से जम्मू-कश्मीर में विभिन्न दलों के राजनेताओं को नजरबंद कर दिया गया था।
इसमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती समेत कई नेता भी शामिल थे। जम्मू-कश्मीर प्रशासन की तरफ से फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला को तो रिहा किया जा चुका है जबकि महबूबा मुफ्ती अभी भी नजरबंदी में है।
