राजधानी दिल्ली में छठ पूजा की अनुमति नहीं मिलने पर भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने बुधवार को सीएम केजरीवाल को निशाने पर ले लिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार सोशल डिस्टेंसिंग नियमों के नाम पर छठ नहीं मनाने दे रही और केंद्र सरकार से दिशा-निर्देश मांग कर झूठा ड्रामा कर रही है। दिल्ली भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने केजरीवाल के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल भी किया।

मनोज तिवारी ने 18 नवंबर को ट्वीट कर कहा, ‘कमाल के नमकहराम मुख्यमंत्री हैं अरविंद केजरीवाल। कोविड-19 के सोशल डिस्टेंसिंग नियमों का पालन कर आप छठ नहीं करने देंगे और दिशा-निर्देश केंद्र से मांगने का झूठा ड्रामा अपने लोगों से करवाते हैं। तो बताए, ये 24 घंटे शराब परोसने के लिए अनुमति कौन सी गाइडलाइन को फॉलो कर ली थी, बोलो सीएमी।’ तिवारी के ट्वीट पर आम आदमी पार्टी ने प्रतिक्रिया दी। उनके ट्वीट को रिट्वीट कर कहा गया कि मनोज तिवारी को शर्म आनी चाहिए।

दिल्ली के उत्तम नगर से आप विधायक नरेश बाल्यान ने भाजपा नेता के ट्वीट पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कमाल की बीमारी हो तिवारी। छठ पूजा पर रोक हरियाणा सरकार ने भी लगाई है, और वहां भाजपा सरकार है, इतनी बेशर्मी से बयान देते आपको शर्म नहीं आती? आपका क्या? आप सांसद हैं, आपके लिए AC स्टार हॉस्पिटल हैं, पर आम लोगो का क्या होगा? दिल्ली हाईकोर्ट का बयान सुनो बेशर्म तिवारी जी।

आप नेता दुर्गेश पाठक ने ट्वीट कर कहा कि गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी छठ पूजा पर प्रतिबंध लगाया गया है। मनोज तिवारी क्या योगी, खट्टर और विजय रूपानी को भी ‘नमकहराम’ कहेंगे? शर्म आती है जब किसी सांसद द्वारा ऐसे नीच शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर दिल्ली सरकार द्वारा जलाशय, नदी तट और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर छठ पूजा के आयोजन पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर बुधवार को हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में पहले से संक्रमण की तीसरी लहर चल रही है और बड़े स्तर जमावड़े को अनुमति देने से संक्रमण का खतरा और फैल सकता है।

जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सुब्रह्मण्यम प्रसाद की एक पीठ ने दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के अध्यक्ष द्वारा जारी प्रतिबंध आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका खारिज कर दी। डीडीएमए ने अपने आदेश में कहा था कि 20 नवंबर को छठ पूजा के लिए सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ के जमा होने की अनुमति नहीं होगी। दुर्गा जन सेवा ट्रस्ट ने अदालत में डीडीएमए के फैसले को चुनौती दी थी।

ट्रस्ट ने छठ पूजा के लिए 1,000 लोगों के जमा होने को लेकर अनुमति देने का अनुरोध किया। इस पर पीठ ने कहा, ‘दिल्ली सरकार शादियों में 50 से ज्यादा लोगों को आने की इजाजत नहीं दे रही है और आप चाहते हैं कि केवल 1,000 लोग आएं।’ पीठ ने कहा कि प्राधिकरण ने दिल्ली में संक्रमण के प्रसार को देखते हुए आदेश जारी किया और कहा कि याचिका में दम नहीं है।

पीठ ने कहा कि मौजूदा समय में इस तरह की याचिका जमीनी सच्चाई से परे है। साथ ही कहा कि याचिकाकर्ता को शहर की मौजूदा स्थिति पर भी गौर करना चाहिए। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता कोविड-19 की स्थिति से अवगत नहीं है। अदालत ने कहा, ‘संक्रमण के 7800 से 8593 तक मामले आ रहे हैं …कई मौतें हो रही हैं। शहर में 42,000 मरीजों का उपचार चल रहा है।’ राजधानी में हजारों लोग खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोग छठ पूजा मनाते हैं। (एजेंसी इनपुट)