बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई। हाई कोर्ट ने राज्य में ‘कानून व्यवस्था पर शासन की ढिलाई’ को देख चिंता व्यक्त की और भाजपा सरकार से कैबिनेट मंत्री और शिवसेना विधायक भरत गोगावाले के बेटे विकास गोगावाले को गिरफ्तार न करने पर सवाल उठाया।

विकास का नाम पिछले माह रायगढ़ जिले में महाड नगर निकाय चुनावों के दौरान शिवसेना और एनसीपी गुटों के बीच हिंसक झड़प के संबंध में दर्ज क्रॉस-एफआईआर में है।

शुक्रवार सुबह तक करेगा सरेंडर- वकील

कोर्ट से फटकार लगने के एक घंटे से अधिक समय बाद सरकार के वकील ने बेंच को सूचित किया कि मंत्री के बेटे से उसके पिता खुद संपर्क करेंगे और वह शुक्रवार सुबह तक सरेंडर कर देगा।

जस्टिस माधव जामदार ने की ये टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जस्टिस माधव जामदार ने टिप्पणी की, वह मंत्रिमंडल के मंत्री हैं और उनका बेटा फरार है और पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पा रही है तो क्या महाराष्ट्र में कानून के शासन की यही स्थिति है? यह राजनीतिक मामला है और अपराध चुनाव प्रक्रिया से भी जुड़ा है। सरकार चाहे तो 24 घंटे के भीतर किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है।”

आगे जस्टिस माधव ने कहा, “मंत्री का बयान जानबूझकर क्यों दर्ज नहीं किया गया? क्या मुख्यमंत्री इतने लाचार हैं कि कुछ कर ही नहीं सकते? रिकार्ड में दर्ज स्थिति स्पष्ट रूप से दिखा रही है कि महाराष्ट्र में कानून का शासन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।”

प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक, निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद 2 दिसंबर 2025 को वोटिंग के दिन झड़प हुई। पिछले माह हाई कोर्ट ने विकास गोगावाले, उनके चचेरे भाई महेश गोगावाले और कुछ अन्य लोगों की अग्रिम जमानत खारिज कर दी और कहा कि ये अपराध बहुत गंभीर हैं।

मंत्री को क्यों दिया जा रहा सम्मान?

जस्टिस माधव जामदार ने टिप्पणी करते हुए कहा, “आज मैंने न्यूजपेपर पढ़ा कि यह मंत्री 26 जनवरी को ध्वजारोहण करने जा रहे हैं। इस मंत्री को यह सम्मान क्यों दिया जा रहा है? वे राज्य में मंत्रिमंडल के मंत्री और उनका बेटा फरार हैं। पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पा रही है तो क्या यही राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति है? क्यों? वह (विकास)कोई आम व्यक्ति नहीं है और मंत्री अभी मंत्रिमंडल में हैं।”

हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से पेश हुए वकील से इस मामले पर मंत्री और यहां तक कि मुख्यमंत्री से भी निर्देश लेने को कहा।

एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने कहा कि आरोपियों का पता लगाने के लिए तैनात टीमें जांच कर रही हैं, वारंट जारी किए जा चुके हैं और प्रक्रिया के मुताबिक उनकी संपत्तियां भी जब्त की जा चुकी हैं।

मंत्री के संपर्क में है बेटा

कोर्ट के सामने एक न्यूज रिपोर्ट के बारे में बताया गया कि जिसमें मंत्री के हवाले से कहा गया था कि उनका बेटा फरार नहीं है और उनके संपर्क में हैं। कोर्ट ने गौर किया कि आरोपी महेश गोगावाले ने आगामी जिला परिषद चुनावों के लिए नामांकन दाखिल किया था, जिससे बेंच नाराज हो गई। मिलिंद साठे ने कहा कि नामांकन एक प्रस्तावक के जरिए से दाखिल किया गया था।

जस्टिस माधव ने सुझाव देते हुए कहा कि आरोपी बेटे को पुलिस के सामने सरेंडर कर देना चाहिए। आगे कहा, “कोई विशेष नागरिक नहीं होता।”

मंत्री भरत गोगावाले से बात करने के बाद अर्टानी जनरल ने शाम 5 बजे कहा कि मंत्री अपने बेटे से संपर्क करेंगे, जिसके बाद वह सरेंडर कर देगा। कोर्ट ने मामले को शुक्रवार तक के लिए स्थगित करते हुए आदेश दिया, “पहले मुख्य मामले पर ध्यान दें, उससे पहले उसे सरेंडर करने के लिए कहें।”

क्या था मामला?

यह मामला दो दिसंबर को हुआ था, इस दिन महाड नगर परिषद के लिए वोटिंग हो रही थी और निषेधाज्ञा लागू थी। उस दिन शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित गुट) के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं। उसी दिन दोनों गुटों के खिलाफ क्रॉस एफआईआर दर्ज की गई, एक में विकास, महेश और अन्य लोगों के नाम दर्ज हैं और दूसरी एफआईआर में एनसीपी के पूर्व विधायक माणिक जगताप के बेटे श्रीयश जगताप और उनके समर्थकों के खिलाफ दर्ज की गई थी।

एनसीपी ने आरोप लगाया था कि विकास और शिवसेना के समर्थक बाइक से आए और अन्य धमकाया। फिर एक अन्य मतदान केंद्र पर माणिक जगताप के समर्थकों पर हमला कर दिया।

इधर शिवसेना गुट ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्रों से लौटते समय एनसीपी कार्यकर्ता ने कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी और गोगावाले भाइयों पर गोली चलाई, जिससे वे बाल-बाल बचे। आगे पढ़िए महाराष्ट्र में भाजपा और ओवैसी की पार्टी आ गई साथ