बिहार के विधानसभा चुनाव में बेहद करारी हार का सामना करने के बाद महागठबंधन में आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। यह जुबानी जंग तब शुरू हुई जब कुछ दिन पहले कांग्रेस हाईकमान के द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली आए बिहार कांग्रेस के नेताओं ने खुलकर कहा कि पार्टी के नेताओं का एक वर्ग आरजेडी के साथ गठबंधन करने के बजाय अकेले चुनाव लड़ने के पक्ष में था।
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा, जिसमें एनडीए ने 202 सीट जीतकर सत्ता बरकरार रखी। महागठबंधन को केवल 35 सीटें मिलीं, जिनमें से 25 आरजेडी ने, छह कांग्रेस ने और बाकी चार सीटें भाकपा (माले) लिबरेशन, सीपीएम और आईआईपी ने जीती।
बिहार में जिन 25 सीटों पर जीती राजद, उनमें से आठ पर पांच हजार से कम रहा जीत का अंतर
आरजेडी के साथ गठबंधन न किया होता तो….
पिछली विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता रहे और इस बार हारने वाले शकील अहमद खान ने भी अपनी बात रखी। शकील अहमद खान ने कई न्यूज चैनलों से बातचीत में कहा, “हमारे ज्यादातर उम्मीदवारों की यही राय थी कि अगर हमने आरजेडी के साथ गठबंधन न किया होता तो हम बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे। भविष्य की रणनीति क्या होगी, यह पार्टी आलाकमान को तय करना है।”
कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि कई नेताओं का ऐसा मानना है कि एनडीए के द्वारा उठाया गया ‘जंगल राज’ का मुद्दा गठबंधन सहयोगियों पर भी नकारात्मक असर डालता है। इसके अलावा, आरजेडी के साथ गठबंधन के बारे में कहा जाता है कि इससे ऊंची जातियां नाराज हो गई हैं। इन जातियों को पहले कांग्रेस का समर्थक माना जाता था और अब वे भाजपा की ओर चली गयी हैं।
आरजेडी ने कहा- हमारी बदौलत मिले कांग्रेस को वोट
आरजेडी को 2020 के विधानसभा चुनाव में मिली 75 सीटों के मुकाबले मात्र 25 सीटें ही मिलीं हैं लेकिन पार्टी ने कांग्रेस की राय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस मामले में आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा, “अगर कांग्रेस अकेले चलना चाहती है, तो उसे हर हाल में ऐसा करना चाहिए। उसे अपनी औकात पता चल जाएगी।”
मंडल ने कहा, “कांग्रेस को जो भी वोट मिले हैं, वह आरजेडी की बदौलत हैं। राज्य में वह खत्म हो चुकी ताकत है। हम चुनाव दर चुनाव उनकी गलत मांगों को झेलते आ रहे हैं। 2020 में, उन्होंने 70 सीटों पर चुनाव लड़ने पर जोर दिया और केवल 19 सीटें ही जीत सके। हाल के चुनावों में उनकी जीत की दर बेहद खराब रही है। फिर भी, अगर उन्हें लगता है कि अकेले चलना उनके लिए बेहतर है, तो उन्हें ऐसा जरूर करना चाहिए।”
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सीट बंटवारे में दिखा झगड़ा
अहम बात यह है कि गठबंधन सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे की व्यवस्था भी चुनावों में ठीक नहीं रही और आरजेडी, कांग्रेस और वाम दलों के बीच लगभग एक दर्जन सीटों में “दोस्ताना मुकाबला” हुआ।
इसे लेकर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, “कांग्रेस और आरजेडी चुनाव के दौरान लड़ते रहे और अब भी लड़ रहे हैं। ऐसा होना ही था क्योंकि उनके गठबंधन का न तो कोई वैचारिक आधार है और न ही जनहित के मुद्दों पर कोई साझा प्रतिबद्धता। यह दरार और गहरी होने वाली है।”
तेजस्वी यादव को चुना नेता
इस बीच, महागठबंधन में शामिल दल सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा के उद्घाटन सत्र से पहले एकता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। शनिवार को महागठबंधन की बैठक हुई जिसमें सभी दलों के विधायकों ने सर्वसम्मति से आरजेडी के तेजस्वी यादव को अपना नेता चुना।
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