Bihar News: बिहार में जितिया व्रत उत्सव काफी धूमधाम से मनाया जाता है लेकिन आज इस महोत्सव को लेकर स्नान के दौरान राज्य के अलग-अलग जिलों में 43 लोगों की डूब कर मौत हो गई। दर्दनाक बात यह भी है कि मरने वालों में 37 बच्चे शामिल थे। इसके अलावा तीन लोग लापता है। राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक 43 लोगों शव निकाले गए हैं। बच्चों की सलामती के लिए महिलाएं ये व्रत रखती हैं और इस हादसे में 37 बच्चों की ही मौत हुई, जो कि उन माताओं के लिए सर्वाधिक दर्दनाक रहा।
राज्य सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक सूबे के अलग-अलग जिलों में 37 बच्चों और 6 मां की नदी-पोखर में नहाने के दौरान डूबने से मौत है। बता दें कि ज्यादातर त्योहार के दौरान पवित्र स्नान के लिए नदी या तालाब गए थे और हादसे का शिकार हो गए। पूरे राज्य में 37 बच्चों और 7 महिलाओं समेत कुल 46 लोगों की मौत हुई है।
सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान
जितिया व्रत के अलावा 3 लोगों का अब भी पता नहीं चल पाया हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर अब तक 8 मृतकों के परिजनों को मुआवजा के रूप में चार-चार लाख रुपए का नकद भुगतान भी कर दिया गया है। बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक SDRF और NDRF के जवान लगातार सर्च अभियान चला रहे हैं।
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मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि के रूप में चार लाख की राशि प्रदान की जाएगी जो राज्य सरकार द्वारा ऐसे मामलों में मुआवजा के लिए स्वीकृत है। जितिया उत्सव इस हादसे के चलते मातम में बदल चुका है। बता दें कि सबसे ज्यादा लोग औरंगाबाद में डूबकर मरे हैं। इसके अलावा कैमूर जिले के भभुआ और मोहनिया थाने में सात बच्चे दुर्गावती नदी और तालाब में स्नान के दौरान डूबने से मरे हैं।
इतना ही नहीं, पटना के बिहटा थाना इलाके के अमनाबाद गांव में चार बच्चों की मौत हुई है। सारण जिले के दाउदपुर, मांझी, तरैया और मढ़ौरा में दो बच्चों समेत पांच की मौत हुई है।
