बिहार में कोरोना वायरस महामारी के चलते हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था भी बेहाल है। सूबे में रोजाना एक हजार से ज्यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। आधा दर्जन अस्पतालों में ना तो वेंटिलेटर है और ना ही आईसीयू। अस्पतालों में बेड की भी किल्लत है। बिहार में कोरोना के शुक्रवार को 1820 नए केस सामने आए हैं। इनमें से 1083 केस 22 जुलाई के हैं, जबकि 737 केस 22 जुलाई के हैं। इसके साथ ही राज्य में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 33 हजार 511 हो गई है।
पीएमचीएच की हाल की बात करें तो यहां सिर्फ 60 आईसीयू हैं, 60 वेंटिलेटर और महज 100 बेड। वहीं, एनएमसीएच में 20 आईसीयू, 18 वेंटिलेटर और 200 बेड हैं। बिहार के एम्स में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। यहां आईसीयू की संख्या 75 है , वेंटिलेटर की संख्या भी 75 है और कुल 400 बेड हैं।
बिहार के अस्पतालों में क्या है ICU, VENTILATOR और BED की सच्चाई
हैरानी से आँखें खोल देने वाले आँकड़े ।
लॉकडाउन से क्या होगा? तैयारी कहाँ है? #Bihar pic.twitter.com/dm1F7684nL
— Sakshi Joshi (@sakshijoshii) July 23, 2020
जिलेवार आंकड़ों की बात करें तो गया के अस्पताल में 60 आईसीयू, 45 वेंटिलेटर और 544 बेड हैं। शेखुपुरा में हालात और खराब हैं या ना ही वेंटिलेटर है और ना ही आईसीयू, अस्पताल में महज 60 बेड हैं। अररिया में भी आईसीयू , वेंटिलेटर शून्य हैं और बेड महज 60 ही हैं। हाजीपुर में बेड 10 हैं और आईसीयू , वेंटिलेटर शून्य। सुपोल में भी महज 70 बेड हैं और आईसीयू और वेंटिलेटर नदारद हैं। कटिहार में 40 बेड हैं और आईसीयू और वेंटिलेटर एक भी नहीं।
बिहार में कोरोना से बदहाली की तस्वीर लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में एनएमसीएच के सामने एक कोरोना संक्रमित ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया था। वहीं पटना में भी एक कोरोना संक्रमित की लाश 14 घंटे तक घर में पड़ी रही और एंबुलेंस में कोई स्वास्थ्यकर्मी ना होने के चलते बेटों को ही अपने पिता के शव को एंबुलेंस में चढ़ाना पड़ा था।
