उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि साधु-संतों और भक्तों-श्रद्धालुओं के साथ किया जा रहा गलत व्यवहार बेहद दुखद है। अखिलेश यादव ने यह बात मौनी अमावस्या के मौके पर प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और पुलिसकर्मियों के बीच बहस के बाद कही है।
बहस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या का स्नान करने से मना कर दिया। अखिलेश ने यह भी कहा है कि बीजेपी सरकार ‘दिव्य-भव्य’ के दावे से पहले ‘सभ्य’ बने।
अखिलेश यादव ने X पर कहा, सदियों से चली आ रही शाही-स्नान की अखंड सनातनी परंपरा में गत वर्ष भी इसी सरकार द्वारा विघ्न डाला गया था। प्रश्न ये है कि ऐसी घटनाएं बीजेपी की सरकार में ही क्यों हो रही हैं। मौनी अमावस्या का शाही-स्नान क्या पहली बार हो रहा है? इस अवस्था के लिए बीजेपी का कुशासन और नाकाम व्यवस्था ही दोषी है।’
‘मैं जिस भी राज्य में जाऊंगा, उत्तर प्रदेश का उदाहरण जरूर दूंगा’
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, ‘मुख्य को हर जगह ‘मुख्य’ बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अहंकारी भाजपाई शासन और प्रशासन अपने से बड़ा किसी को नहीं मानता है। अब क्या इसका दोष भी ‘एआई’ पर मढ़ेंगे?’
सपा प्रमुख ने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश के गृह सचिव मनमानी कर रहे हैं तो भी गलत है और अगर किसी के निर्देश पर कर रहे हैं तो और भी गलत है। उन्होंने कहा है कि इस घटना कि जांच होनी चाहिए और ऐसा होना घोर निंदनीय है।
श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में रविवार को मौनी अमावस्या पर दोपहर 12 बजे तक 3.15 करोड़ श्रद्धालु ने गंगा और संगम में डुबकी लगा चुके थे। इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्नान कर रहे श्रद्धालुओं और साधु संतों पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई। मेला प्रशासन का कहना है कि कल रात 12 बजे से ही स्नान करने के लिए लोगों का गंगा और संगम क्षेत्र में आना जारी है।
मेला क्षेत्र में 25,000 से अधिक शौचालय बनाए गए हैं और 3500 से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं। उन्होंने बताया कि छोटी अवधि का कल्पवास करने के इच्छुक लोगों के लिए माघ मेला में टेंट सिटी बनाई गई है जहां ध्यान और योग आदि की सुविधाएं मौजूद हैं।
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