राजधानी सहित आसपास के क्षेत्र में हवा की गति व तापमान कम और नमी का स्तर ज्यादा होने के कारण सोमवार को हवा की गुणवत्ता फिर बेहद खराब दर्जे की रही। यही स्थिति अगले तीन दिन बनी रहने की आशंका है। वाहनों, उद्योगों और पराली से बढ़ा प्रदूषण रोक पाने में नाकाम पर्यावरण महकमा अब इसके प्रभाव को कम करने के लिए हाथ पांव मार रहा है। सब कुछ ठीक रहा तो अगले दो तीन दिन में कृत्रिम बारिश कराने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं लेकिन उसके लिए भी बादलों का ही इंतजार करना पड़ रहा है जिनके 21 नवंबर को घिरने के आसार हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक हवा का गुणवत्ता इंडेक्स 322 दर्ज किया गया जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। बोर्ड का कहना है कि दिल्ली में 14 जगहों पर हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ रही जबकि 14 अन्य जगहों में ‘खराब’ मापी गई। आंकड़े बताते हैं कि सोमवार को दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 का स्तर 167 दर्ज किया गया जबकि पीएम 10 का स्तर 307 रहा। वायु गुणवत्ता व मौसम पूर्वानुमान प्रणाली (सफर) के मुताबिक हवा की गति कम होने और आर्द्रता का स्तर बहुत ज्यादा होने के कारण हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ दर्जे में ही बने रहने की आशंका है। यह अगले तीन दिन तक ऐसा ही रहने के आसार है।

पर्यावरण मंत्रालय ले सकता है कृत्रिम बारिश का फैसला: मौसम संबंधी बदलावों और प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों पर लगाम लगाने में असमर्थ केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय अब किसी तरह प्रदूषण की घनी परत को बारिश के सहारे हटाने की जुगाड़ में है। इसके लिए विमान से रासायनिक पदार्थों की बौछार मारकर बादलों को सक्रिय करने की कोशिश की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की अधिकार प्राप्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने राजधानी सहित एनसीआर में प्रदूषण को कम करने के लिए निजी वाहनों की आवाजाही रोकने के या सम-विषम लागू करने के संबंध में सीपीसीबी से सुझाव मांगे थे लेकिन राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर्याप्त न होने और सीएनजी आपूर्ति में कमी को देखते हुए सीपीसीबी अभी तक इस पर कुछ निर्णय नहीं ले पाया है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने सालों से दिल्ली में बसों की संख्या पर्याप्त नहीं की जा सकी। दस हजार बसें चलाने की बात राष्ट्रमंडल खेलों के समय से हो रही है। सीपीसीबी के समिति के कार्यबल में शामिल डॉक्टर टीके जोशी ने कहा है कि मौसम संबंधी बदलावों के कारण थोड़ा भी प्रदूषण हो तो वह वायुमंडल के निचले स्तर पर ही बना हुआ है जिसके कारण धुंध बढ़ जाती है। हवा चलने के साथ ही प्रदूषण में कमी आ जाती है। उन्होंने बताया कि हमने पर्यावरण मंत्रालय से काफी पहले ही सिफारिश की थी कि कृत्रिम बारिश के जरिए प्रदूषण की परत धोई जा सकती है।