1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान यहां के महिपालपुर में दो लोगों की हत्या में दो लोगों को दोषी ठहराया गया है। वारदात के करीब 33 साल बाद गुरुवार को अदालत दोनों को सजा सुनाएगी। बुधवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय पांडे ने नरेश सेहरावत और यशपाल सिंह को दंगों के दौरान दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर में हरदेव सिंह और अवतार सिंह की हत्या का दोषी ठहराया। बुधवार को दोनों आरोपी दोषी सिद्धि के एलान के समय खचाखच भरी अदालत में मौजूद थे। यह मामला हरदेव सिंह के भाई संतोष सिंह ने दर्ज कराया था। इस मामले में सुनवाई दो बार हुई। दिल्ली पुलिस ने साक्ष्यों के अभाव में 1994 में यह मामला बंद कर दिया था, लेकिन दंगों की जांच के लिए गठित एसआइटी ने मामले को दोबारा खोला। 1992 में जस्टिस रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफारिश पर पुलिस ने इस मामले की फिर से जांच की।

अदालत ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की अनेक धाराओं के तहत जैसे दोषी ठहराया। इसके तत्काल बाद दोनों को हिरासत में ले लिया गया। अब अदालत गुरुवार को सजा की अवधि पर सुनवाई करेगी। दोषियों को अधिकतम फांसी और न्यूनतम उम्रकैद की सजा सुनाई जा सकती है। इससे पहले अदालत में दोनों पक्ष सजा पर बहस करेगें।
31अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के दंगों में 3000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जिसमें 2000 से ज्यादा लोग दिल्ली में मारे गए थे। यह वारदात भी इन्हीं में से एक है।

बता दें कि महिपालपुर में हरदेव सिंह व अवतार सिंह की हत्या एक दुकान के सामने हुई थी। अवतार सिंह सेना में काम करता था व अवतार सिंह का पड़ोसी था। इसमें संगत सिंह व कुलदीप सिंह को भीड़ ने जख्मी कर दिया था। इनकी दुकानों को आग लगा दी गई थी।