उत्‍तर प्रदेश में चुनावी तैयारियों के बीच हाल ही में अखिलेश यादव के करीबियों पर इनकम टैक्‍स की रेड मारी गई। जिन लोगों पर रेड मारी गई उनके नाम हैं- सपा प्रवक्ता और राष्ट्रीय सचिव राजीव राय, ठेकेदार जगत सिंह, कारोबारी राहुल भसीन। इसके अलावा अखिलेश यादव के ओएसडी रहे जैनेंद्र और मनोज यादव के यहां भी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने छापे मारे।

यूपी में 2022 में चुनाव हैं, ऐसे इस छापेमरी की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच NDTV 24×7 ने Raid on BJP Rivals: Cleanup for vendetta? हेडलाइन के साथ एक प्रोग्राम किया, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े दिखाए गए हैं। इन आंकड़ों के हिसाब से यूपीए-2 सरकार से तुलना करने पर पता चलता है कि बीजेपी के राज में विरोधियों पर 340 प्रतिशत ज्‍यादा रेड मारी गई हैं। आंकड़ों को देखा जाए तो ये भी पता चलता है कि चुनावों के दौरान या जब भी विपक्षी पार्टी में बगावत की स्थिति आई तो अचानक से रेड की संख्‍या भी बढ़ती चली गई। आइए सबसे पहले डालते हैं आंकड़ों पर एक NDTV 24×7 ने पेश किए हैं:

-2014 में मोदी सरकार के केंद्र की सत्‍ता में आने के बाद से अब तक बीजेपी के विरोधियों पर कुल 570 रेड मारी गईं। इनमें 400 रेड राजनीतिक विरोधियों पर मारी गईं, जबकि बाकी अन्‍य आलोचकों पर। मतलब ऐसे लोग जो या तो बीजेपी के विरोधियों के मददगार हैं, या बीजेपी की खुलकर आलोचना करते हैं।

-2014 के बाद से अगर बीजेपी के गठबंधन सहयोगियों की बात करें तो उनके खिलाफ अब तक कुन 39 बार रेड मारी गई।

-अब अगर UPA-2 के कार्यकाल में मारी गई रेड के आंकड़े की बात करें, इस दौरान राजनीतिक विपक्षियों पर कुल 85 रेड मारी गईं।

-मतलब कुल 2014 से अब तक बीजेपी के कार्यकाल में कुल 570 और यूपीए-2 के कार्यकाल में कुल 85। इस हिसाब से देखें तो मोदीराज में विपक्षियों पर 340 प्रतिशत रेड ज्‍यादा मारी गईं।

– इसी आंकड़े को अगर साल के हिसाब से देखें तो यूपीए-2 के कार्यकाल में हर साल करीब 17 रेड विपक्षियों पर मारी गईं, जबकि एनडीए के 2014 के बाद से अब तक के कार्यकाल में हर साल करीब 75 रेड विपक्षियों पर मारी गईं।

-2014 के बाद से एनडीए के राज में कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कुल 75 रेड मारी गईं।

-इसी प्रकार से टीएमसी नेताओं के खिलाफ 36 बार रेड मारी गई। आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ 18 और पीडीपी नेताओं के खिलाफ 12 बार रेड मारी गई। एनसीपी के खिलाफ 8, डीएमके के खिलाफ 11, टीडीपी 12, नेशनल कॉन्‍फ्रेंस के खिलाफ 14, आरजेडी के खिलाफ 8, बीएसपी के खिलाफ 7 और जेडी (एस) के खिलाफ 6 बार रेड मारी गईं। कई और भी छोटे दल हैं, जिनके खिलाफ एक-एक रेड मारी गईं। इसके अलावा पत्रकार, मूर्वी स्‍टार, एक्टिविस्‍ट भी छापेमारी की जद में आ गए।

अब जरा रेड की टाइमिंग के बारे में बात करते हैं

-तमिलनाडु में 2021 चुनाव से 4 दिन पहले एमके स्‍टालिन की बेटी और उनके दामाद के खिलाफ टैक्‍स रेड मारी गई। इसके अलावा भी कई नेताओं पर रेड मारी गई।

-इसी प्रकार से 2021 बंगाल चुनाव से ऐन पहले और चुनाव के बीच में करीब 14 टीएमसी नेताओं के खिलाफ रेड मारी गई।

-2020 में जब राजस्‍थान कांग्रेस में सचिन पायलट ने बगावत की, ठीक उसी समय 6 कांग्रेस नेताओं के खिलाफ रेड मरी गई। जिन नेताओं पर छापेमारी की गई, उनमें अशोक गहलोत का बेटा, भाई और ओएसडी भी शामिल हैं।

-2019 में जब कर्नाटक में पॉलिटिकल क्राइसिस चल रहा था उस वक्‍त वहां पर भी 14 जेडी (एस) और कांग्रेस नेताओं के खिलाफ रेड मारी गई।

-गुजरात में राज्‍यसभा इलेक्‍शन से पहले भी रेड मारी गई। कर्नाटक के उस रिसॉर्ट में टैक्‍स रेड मारी गई थी जिसमें 42 कांग्रेस विधायक रुके हुए थे।

-अब यूपी में इलेक्‍शन हैं तो वहां पर भी रेड लगातार मारी जा रही हैं।