USA-Venezuela Conflict: वेनेजुएला पर अमेरिका का हमला और वहां के तात्कालिक राष्ट्रपति निकोलस मादुरो एवं उनकी पत्नी को हिरासत में लेने के मामले में दुनिया एक बार फिर से बंट गई लगती है। कई देशों ने वेनेजुएला पर अमेरिका की इस कार्रवाई का स्पष्ट विरोध किया है। मगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों का प्रचार करने की रणनीति भी पीछे नहीं है। समर्थन और विरोध से इतर यह सवाल अनुत्तरित रहेगा कि आखिर मादुरो पर ही यह कार्रवाई क्यों की गई! यदि नशीले पदार्थों की तस्करी ही उनका गुनाह-ए-अजीम है, तो इसको लेकर तो चीन पर भी सवाल उठते रहे हैं।
देखा जाए तो वेनेजुएला के विपुल खनिज और तेल पर अमेरिकी कंपनियों का नियंत्रण, ट्रंप की नीयत को पूरी तरह से उजागर नहीं करता है। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव का यह सिलसिला पुराना है। वेनेजुएला में वर्ष 1999 में ह्यूगो शावेज के सत्ता संभालने के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव की शुरुआत हो गई थी। शावेज खुद को समाजवादी और अमेरिकी साम्राज्यवाद का विरोधी बताते थे। उन्होंने अमेरिका को आंख दिखाते हुए क्यूबा और ईरान जैसे कई अमेरिकी विरोधी देशों से दोस्ती बढ़ाई। कहानियां यह भी गढ़ी जा रही हैं कि अमेरिका के हमले का मकसद उस ‘स्वघोषित समाजवादी क्रांति’ को खत्म करना है, जिसे मादुरो के राजनीतिक गुरु और पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने 1999 में शुरू किया था।
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बात फिर नशीले पदार्थों की तस्करी पर आती है कि आखिर वह ऐसा कौन सा पदार्थ था, जिसकी वजह से अमेरिका की नींद हराम हो गई थी? यह गांजा, अफीम, चरस-हशीश, या हेरोइन नहीं, बल्कि सबसे घातक नशीला पदार्थ ‘फेंटानिल’ है। कहा जा रहा है कि इस पदार्थ की तस्करी ने अमेरिका में बड़ी संख्या में लोगों की जान ले ली। इसने ट्रंप की आभासी मुद्रा क्रिप्टोकरंसी को तबाह कर दिया। कायदे से बहस फेंटानिल के मुख्य आपूर्तिकर्ता चीन पर और ट्रंप के क्रिप्टो गोरखधंधे पर होनी चाहिए थी।
एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1999 से अब तक अमेरिका में लगभग दस लाख लोगों की इस नशीले पदार्थ की वजह से मौत हो चुकी है। वर्ष 2020 में नशीले पदार्थों से हुई मौत के कुल मामलों में से 82 फीसद फेंटानिल से जुड़े थे। 2022 में यह संख्या 107,941 पर पहुंच गई। 2025 तक अमेरिका में नशीले पदार्थों से होने वाली मौत की दर दोगुनी से ज्यादा हो गई, इसका मुख्य कारण फेंटानिल की बढ़ती तस्करी को माना गया है। दरअसल, फेंटानिल प्रयोगशाला में बनने वाला एक सिंथेटिक नशीला पदार्थ है, जो मार्फिन से 80-100 गुना और हेरोइन से पचास गुना ज्यादा घातक है। वैसे इसका नियंत्रित इस्तेमाल आमतौर पर अस्पतालों में दर्द कम करने के लिए किया जाता है।
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इसकी खरीद-फरोख्त के लिए ‘डार्कनेट’ का सबसे अधिक इस्तेमाल होता है। डार्कनेट बाजार वेब पर एक वाणिज्यिक वेबसाइट है, जिसके जरिए नशीले पदार्थ, हथियार, चोरी किया हुआ डेटा और नकली दस्तावेज का अवैध लेन-देन होता है। उदाहरण के लिए, ‘सिल्क रोड’, जो वर्ष 2011 में बना, वह एक डार्कनेट बाजार था। यह बिटकाइन के शुरुआती उपयोगकर्ताओं में से कुछ का ठिकाना था। ज्यादातर डार्कनेट बाजार अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजंसियों से बचने के लिए अपने मंच पर फेंटानिल जैसे नशीले पदार्थों पर साफ तौर पर प्रतिबंध का संकेत देते हैं। बावजूद इसके, कई लोग फेंटानिल पर दिखाई जाने वाली पाबंदी से बचने का रास्ता निकाल लेते हैं।
वर्ष 2020 की ‘ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन’ (डीइए) की रपट में चीन को फेंटानिल का शीर्ष उत्पादक देश बताया गया था। इस संस्था ने फेंटानिल उत्पादन की एक शृंखला का पता लगाया है, जिसमें खतरनाक रसायनों को अवैध रूप से लैटिन अमेरिकी देशों में भेजा जाता है, जहां उनका इस्तेमाल फेंटानिल बनाने के लिए किया जाता है। इसे बाद में बेचने के लिए अमेरिका ले जाया जाता है। अमेरिका के कानून प्रवर्तन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस नशीले पदार्थ से जुड़े लेन-देन में शामिल अधिकांश लोग आभासी मुद्रा क्रिप्टोकरंसी का इस्तेमाल करते हैं। कई अमेरिकियों को लगता है कि प्रवासी लोग ही उनके देश में फेंटानिल ला रहे हैं।
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मगर आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि फेंटानिल की तस्करी और अवैध बिक्री में प्रवासी लोग केवल पच्चीस फीसद और अमेरिकी नागरिक पचहत्तर फीसद शामिल हैं। अमेरिका का प्रशासन अपने ही घर में इसे रोक पाने में नाकाम रहा। विश्लेषकों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के रहते हुए फेंटानिल की तस्करी के तरीकों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। इसका बड़े पैमाने पर विश्लेषण करने के लिए ‘चैनालिसिस’ ने चीन में सक्रिय फेंटानिल के घटक रसायनों के विक्रेताओं से जुड़े क्रिप्टोकरंसी पते की पहचान की। इनके पास वर्ष 2015 से अब तक 98 मिलियन डालर से ज्यादा की क्रिप्टोकरंसी का पता चला है। चैनालिसिस एक अमेरिकी ब्लाकचेन विश्लेषण फर्म है, जिसका मुख्यालय न्यूयार्क सिटी में है।
सबको इस बात की खलिश है कि भारत ने वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले की कार्रवाई को लेकर संतुलित बयान जारी क्यों किया। भारत ने रविवार को राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़े जाने पर गहरी चिंता जताई और सभी पक्षों से क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने की अपील की। मगर, हम एक घटना का विश्लेषण गहराई से करेंगे, तो बात समझ में आ जाएगी कि भारत के इस बयान के क्या मायने हैं। 18 सितंबर, 2025 को नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास की वेबसाइट पर एक सूचना जारी की गई कि ‘फेंटानिल प्रीकर्सर की तस्करी में शामिल होने के कारण भारतीय कंपनी के अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों के अमेरिकी वीजा रद्द।’ दूतावास ने स्पष्ट किया कि ये व्यक्ति अमेरिका की यात्रा के लिए अयोग्य हो सकते हैं।
साथ ही कहा कि दूतावास उन कंपनियों से जुड़े अधिकारियों पर भी कड़ी नजर रख रहा है, जिनके बारे में पता चला है कि उन्होंने फेंटानिल प्रीकर्सर की तस्करी की है। फेंटानिल के प्रवाह को रोकना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। यह दिलचस्प है कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस कार्रवाई पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। डोनाल्ड ट्रंप दुनिया को बता रहे हैं कि नशीले पदार्थों की तस्करी ही मादुरो का मुख्य गुनाह है, लेकिन वे यह नहीं बता पा रहे कि इस अवैध धंधे से उनकी कंपनी की क्रिप्टोकरंसी का कितना नुकसान हुआ है। एक हालिया रपट के अनुसार, वर्ष 2025 के आखिर में क्रिप्टो बाजार में गिरावट के कारण ट्रंप की कंपनी की कुल संपत्ति का मूल्य एक बिलियन डालर से ज्यादा कम हो गया।
ब्लूमबर्ग के अनुसार, इस परिवार की संपत्ति का कुल मूल्य लगभग 7.7 बिलियन डालर से घटकर 6.7 बिलियन डालर रह गया और यह डिजिटल संपत्ति में गिरावट के कारण हुआ है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि नशीले पदार्थ फेंटानिल के उत्पादन से जुड़े क्रिप्टोकरंसी-आधारित लेन-देन ने ‘ट्रंप मेमेकाइन’ को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप अपने इस दर्द को सार्वजनिक नहीं कर सकते, लेकिन उन्होंने वेनेजुएला पर कार्रवाई करके एक तीर के साथ कई निशाने साधे हैं।
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