एक बार फिर राम मंदिर और मंदिर के शीर्ष कलश पर केसरिया ‘धर्म ध्वजारोहण’! चैनलों पर सुबह से सीधा प्रसारण। अयोध्या में हर तरफ केसरिया रंग का जलवा, मंदिर की विराटता, उसके दर्शकों में भारी वृद्धि के आंकड़े। प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य गणमान्य मंत्री, नेता, सांसद, साधु-संतों की उपस्थिति।

खासी ऊंचाई पर प्रधानमंत्री का धर्म-ध्वज फहराना, संबोधन..! कुछ चुनिंदा वाक्य ये हैं- ‘आज हजारों वर्षों के घाव भर रहे हैं… ध्वज सभ्यता का पुनर्जागरण है… एकरूपता का प्रतीक है… शक्ति की प्रेरणा है। ये दिव्य क्षण हैं। यह सिर्फ धर्म-ध्वज नहीं, भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान का प्रतीक है। अयोध्या भारतीय चेतना की प्रतीक है… देशवासी राम के आदर्शों का अनुकरण करें… यह समय में खींची हुई लकीर है! मैकाले ने हमें मानसिक गुलाम बनाया है, हमें उससे मुक्त होना है! अगर हम ठान लें कि आगे के दस साल में हम इस मानसिक गुलामी से आजादी पा लें, तभी 2047 में हम मैकाले की गुलामी को खत्म कर सकेंगे… तभी सच्ची आजादी मिलेगी..!’

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इधर प्रधानमंत्री ‘राम से राष्ट्र’ की बात कर रहे थे, उधर एक विपक्षी नेता कह रहे थे कि उत्तर प्रदेश के चुनाव जीतने के लिए झंडा फहराया गया है… दूसरे कह रहा थे कि पहले अपने यहां राम मंदिर बना लें… फिर जाएंगे अयोध्या! इतने में एक प्रवक्ता ने यह कहकर चौंकाया कि अयोध्या के राजा को तो बुलाया ही नहीं गया। भक्त प्रवक्ता चकराए कि अयोध्या के राजा तो एक ही हैं, यानी राम ही हैं। अब ये नया राजा कौन आ गया? आगे प्रवक्ता ने ही साफ किया कि वहां के राजा हैं वहां के सांसद..!

इधर धर्म ध्वज फहराया गया, उधर बंगाल से घुड़की आई कि अगर बंगाल को कुछ हुआ तो सारे भारत को हिला देंगे! मामला एसआइआर, यानी मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण का था। एसआइआर से डरने वाले की लाइन रही कि सब हो, लेकिन एसआइआर न हो, क्योंकि एसआइआर के बहाने चुनाव की चोरी की जाती है।

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इसी बीच बंगाल के ही एक अल्पसंख्यक नेता ने एलान किया कि तैंतीस वर्ष पुराने दर्द को मिटाएंगे। एक और ने एलान किया कि हम नई बाबरी मस्जिद बनाएंगे। फिर आगे बढ़कर बोले कि हम हर शहर में बनाएंगे, लेकिन जल्द ही उनकी पार्टी ने इसे उनकी निजी उड़ान बताकर अपने को अलग कर लिया।

फिर आया संविधान दिवस! अरसे बाद पहली बार प्रधानमंत्री के साथ विपक्ष के नेता को भी मंच पर खड़े देख बड़ी राहत मिली। इसके आगे दोनों की लाइनें अलग-अलग दिखीं। प्रधानमंत्री ने अधिकार के साथ कर्तव्यों पर भी जोर दिया, जबकि विपक्ष के नेता सिर्फ ‘अधिकार’ पर जोर देते दिखे। बहरहाल, आम आदमी को एक चिट्ठी लिखकर विकसित भारत बनाने के लिए ‘कर्तव्यों’ पर जोर देकर प्रधानमंत्री ने एक बार फिर विपक्ष को छका दिया।

कई चैनलों में एसआइआर के कार्य को संपन्न करने वाले छब्बीस ‘बीएलओ’ की आकस्मिक मृत्यु पर बहसें केंद्रित हुर्इं। विपक्षी प्रवक्ता इन मौतों के लिए चुनाव आयोग द्वारा जल्दी-जल्दी काम निपटाने के दबाव को जिम्मेदार मानते रहे और एसआइआर को बंद करने की मांग करते रहे, जबकि सत्ता प्रवक्ता इसकी जांच की मांग कर एसआइआर की उपयोगिता को रेखांकित करते रहे।

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इसी बीच कर्नाटक के दो नेताओं के बीच कुर्सी की लड़ाई सड़क पर आ गई। एक ने लिखा ‘जो वादा किया, वो निभाना पड़ेगा’ … उपमुख्यमंत्री को मुख्यमंत्री बनाना पड़ेगा। कर्नाटक के दो महारथियों की कुश्ती खुले में आ गई। आगे-आगे देखिए होता है क्या!

एक खुशखबरी आई कि 2030 के राष्ट्रमंडल खेल की मेजबानी भारत के गुजरात को मिली। इसके आगे की खबर बिहार में बुलडोजर संस्कृति के आगमन की रही। बुलडोजर चलता भी दिखा। विपक्ष कहे कि बिहार के नए गृहमंत्री तो बालपन में अपराध के आरोपित रहे हैं। फिर कहे कि बिहार को उत्तर प्रदेश माडल की नकल क्या करना… कि यह सब बदला लेने की भावना से किया जा रहा है… इसे बिहार नहीं सहेगा।

बुलडोजरवादी कहिन कि बुलडोजर ने उत्तर प्रदेश को एक सुरक्षित राज्य बनाया है… बिहार भी बनेगा! फिर एक एंकर ने खबर दी कि बिहार के चार सौ माफियाओं की सूची बन गई है। फिर खबर दी कि सोलह सौ अन्य माफिया की सूची भी बन रही है। जल्दी ही इनका खात्मा होगा।

फिर आया ‘जेन-जी पीढ़ी का भजन’। जेन-जी पीढ़ी, यानी तेरह से लेकर पैंतीस वर्ष के बीच की पीढ़ी! कई चैनलों पर ‘ओम् जय जेन-जी हरे… भारत जन के संकट, क्षण में दूर करे… होने लगा! कुछ नेता जेन-जी से कहते दिखे कि हमारे लिए संविधान बचा… जनतंत्र बचा… हमारा सिंहासन बचा..!

इधर विपक्ष के एक नेता ने ‘जेन-जी पटाओ’ किया, तो जवाब में प्रधानमंत्री ने ‘जेन-जी’ को सीधे संबोधित करते हुए कह दिया कि अगर दुनिया के जेन-जी को कहीं से प्रेरणा मिल सकती है, तो वह भारत से ही मिल सकती है, क्योंकि भारत के जेन-जी में जैसी ‘क्षमता’ है, ‘मौलिकता’ है, वह दुनिया के लिए आदर्श और प्रेरक बन सकती है।