Sudheesh pachauri

बाखबर: सूप बोले तो बोले

इस बीच रजनीकांत ने फिर घोषणा की कि जनवरी में राजनीति में आऊंगा और सब कुछ बदल डालूंगा। एक चैनल पर एक चर्चक बोला : रजनी के आने से एआइडीएमके को नुकसान होगा, लेकिन स्वामी के हवाले से एक चैनल ने लाइन लगाई कि रजनी को हिंदुत्व से परहेज नहीं है।

बाखबर: दिल्ली चलो

दो महीने से अपने ‘अन्नदाता’ नाराज हैं। वे दो महीने से कह रहे हैं ‘दिल्ली चलो’, लेकिन हरियाणा पुलिस उनको दिल्ली की सीमाओं पर, कभी गैस गोले मार कर, कभी पानी की बौछार मार कर, कभी लाठी मार करके, रोके हुए है।

बाखबर: बलम पिचकारी

अधिकांश चैनलों के लिए अब न कोरोना का बढ़ता आंकड़ा कोई खबर है, न कृषि विधेयक के पास किए जाने के बाद का सांसदों का विरोध या किसानों का असंतोष और आंदोलन बड़ी खबर है। किसान मरें या जिएं, उनको एमएसपी मिले न मिले और चाहे कॉरपोरेट कृषि क्षेत्र को चर जाएं, लेकिन बॉलीवुड का खून बहाना चैनलों के लिए सबसे बड़ा काम है!

सुधीश पचौरी का कॉलम : चमक तो थी, पर खनक गायब थी

जो काम डीडी स्टूडियो में आसानी से संभव था, उसी को इंडिया गेट पर लाकर कुछ भव्यता और दिव्यता के साथ किया गया। लगता है कि सरकार पच्चीस हजार की आमंत्रित जनता को इंडिया गेट के लॉन पर बिठा कर उनके सामने एक इवेंट करना चाहती थी!

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