NITI आयोग के एक सदस्य ने कहा है कि जम्मू और कश्मीर में इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने से कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है। आयोग के सदस्य वी के सारास्वत शनिवार (18-01-2020) को Dhirubhai Ambani Institute of Information and Communication Technology (DA-IICT), के वार्षित कॉन्वकेशन में मौजूद थे। यहां उन्होंने जम्मू और कश्मीर में केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल 5 अगस्त को किये गये इंटरनेट बैन को जायज ठहराया और कहा कि इससे आर्थिक मोर्चे पर कोई नुकसान नहीं हुआ है।
इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर आए सारास्वत ने कहा कि ‘ये जितने राजनीतिज्ञ वहां जाना चाहते हैं, वो किस लिए जाना चाहते हैं? वो जैसे आंदोलन दिल्ली की सड़कों पर हो रहा है, वो कश्मीर में सड़कों पर लाना चाहते हैं। जो सोशल मीडिया है उसको वो आग की तरह इस्तेमाल करते हैं…तो आपको वहां इंटरनेट ना हो तो क्या अंदर पड़ता है? और वैसे भी आप इंटरनेट में वहां क्या देखते हैं?वहां गंदी फिल्में देखने के अलावा कुछ नहीं करते आप लोग’
सारास्वत से यह पूछा गया कि था अगर वो यह सोचते हैं कि भारत के विकास के लिए टेलिकॉम जरुरी है तो ऐसे में जम्मू औऱ कश्मीर में इंटरनेट क्यों बंद किया गया? इसी सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने अपनी बातें रखी थी। उन्होंने आगे यह भी कहा कि कश्मीर में इंटरनेट बंद है…लेकिन क्या यह गुजरात में मौजूद नहीं है? कश्मीर में इंटरनेट बंद किये जाने की वजह अलग है। वहां से आर्टिकल 370 हटाया गया है और अगर कश्मीर को आगे ले जाना है तो हम जानते हैं कि वहां कुछ ऐसे लोग हैं जो सूचना के प्रकारों का गलत इस्तेमाल करेंगे जिससे की कानून-व्यवस्था को लेकर समस्या खड़ी हो जाएगी।
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हुए प्रदर्शन पर अपनी राय रखते हुए सारास्वत ने कहा कि जेएनयू अब सियासत का अड्डा बन गया है। सारास्वत जेएनयू चांसलर भी हैं। उन्होंने कहा कि यह फीस बढ़ाने का मुद्द नहीं है…सभी लोग वहां अपना नंबर बढ़ाना चाहते हैं…मैं किसी राजनीतिक पार्टी का नाम नहीं लूंगा। उन्होंने जेएनयू को ‘Left-Leaning’ संस्थान करार देते हुए कहा कि यहां 600 में से 300 शिक्षक हार्डकोर लेफ्ट ग्रुप से संबंध रखते हैं। उन्होंने जेएनयू के वाइस-चांसलर एम जगदीश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि वो बढ़िया काम कर रहे थे।

