उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पांच जून को जन्मदिन होता है। वह इस साल (2022) 50 बरस के हो गए हैं। यूपी और हिंदुस्तान में भले ही वह सरल और सहज अंदाज वाले संत, महंत और सीएम के साथ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के फायरब्रांड नेता माने जाते हों, पर कभी उन्हें फैशनेबल, चमकदार और कसे हुए कपड़े पहनना पसंद था।
आज बेशक वह यूपी में हार्डकोर हिंदुत्व के पोस्टर बॉय माने जाते हों, पर किसी दौर में वह उत्तराखंड के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले नौजवान हुआ करते थे। उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनसे जुड़ी ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जो शायद ही आपको मालूम हों:
योगी का असली नाम अजय सिंह बिष्ट है। उनका जन्म देव भूमि उत्तराखंड स्थित पौड़ी गढ़वाल जिला के पंचूर में पांच जून 1972 को हुआ था। वह बचपन में शाखा (संघ की) भी जाया करते थे।
बड़े होकर कॉलेज पहुंचे तो वहां उन्होंने चुनाव लड़ना चाहा। हालांकि, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से तब उन्हें टिकट न मिला था। फिर भी वह निर्दलीय लड़े, पर उन्हें तब हार का सामना करना पड़ा था। वैसे, छात्र जीवन में वह विभिन्न राष्ट्रवादी आंदोलनों से भी जुड़े रहें।
बीएससी की पढ़ाई करने वाले बिष्ट को कॉलेज के दिनों में कॉलेज के दिनों में फैशनेबल-चमकदार और टाइट कपड़े पहनना बेहद पसंद था। उन्हें इसके अलावा काले रंग के गॉगल्स (धूप वाले चश्मे) लगाना भी अच्छा लगता है। इन बातों का जिक्र “यदा यदा ही योगी” नाम से उनकी जीवनी में पत्रकार विजय त्रिवेदी ने किया है।
22 साल की उम्र में उन्होंने सांसारिक जीवन त्याग कर संन्यास ग्रहण कर लिया और संत बन गए। उन्होंने तब अपना सिर मुंडा लिया था। कान छिदा लिए थे और भगवा चोला ओढ़ नया नाम (योगी आदित्यनाथ) पा लिया था, जो कि उनकी नई पहचान था।
योगी ने साल 1990 के आसपास अपना घर छोड़ दिया था। उन्होंने ऐसा राम मंदिर आंदोलन से जुड़ने के लिए किया था। उसी समय वह महंत अवैद्यनाथ के चेले बन गए थे, जो कि तब गोरखनाथ मठ के मुखिया थे।
पूर्वी उत्तर प्रदेश जब जिहाद, धर्मांतरण, नक्सली और माओवादी हिंसा, भ्रष्टाचार के साथ अपराध की अराजकता में जकड़ा था, तब प्रसिद्ध मठ श्री गोरक्षनाथ मंदिर गोरखपुर में 15 फरवरी सन 1994 को गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने अपने उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ जी का दीक्षाभिषेक संपन्न किया था।
दीक्षा – नाथ सम्प्रदाय में योग दीक्षा सन् 1994 ई0।
दीक्षा गुरु – गोरक्षपीठाधीश्वर परम पूज्य महंत अवेद्यनाथ जी महराज।
अभिरुचि – धर्म, अध्यात्म, शिक्षा, समाज सेवा, सांस्कृतिक चिंतन, लेखन, हिन्दूत्वनिष्ठ राष्ट्रवादी राजनीति और गोरक्षा।
योगी 26 साल की उम्र में सांसद चुने गए। पत्रकार मनोज सिंह के मुताबिक, उन्होंने इसी के आसपास “हिंदू युवा वाहिनी” भी बनाई थी। यह उनकी खुद की सेना मानी जाती है, जिसका मकसद धर्म की रक्षा करना है। बाद में वह साल 2007 में गिरफ्तार भी हुई और इस वजह से उन्हें 11 दिल जेल भी काटनी पड़ी थी।
रोचक बात है कि योगी के टि्वटर अकाउंट से हर ट्वीट में उनका नाम “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज” लिखा जाता है। सियासी जानकारों और विश्लेषकों की मानें तो यह महज संबोधन नहीं है। यह उनके धार्मिक और राजनीतिक कद, पद और महत्ता को दर्शाता है।
गोरखपुर से पांच बार लोकसभा के सदस्य रह चुके महंत योगी आदित्यनाथ को साल 2017 में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी थी। आगे भारतीय राजनीति में योगी ने तेजी से अपनी पहचान स्थापित की।
उन्हीं के नेतृत्व में भाजपा ने 2022 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव लड़ा और पार्टी ने फिर से सत्ता में शानदार वापसी की। अपने अब तक के शासन में योगी आदित्यनाथ ने एक सख्त प्रशासक की छवि विकसित की है।
