उत्तरप्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने को हैं। चुनाव से पहले सभी पार्टियां जातीय समीकरण साधने में जुट गई है। इसी कड़ी में मायावती की पार्टी बसपा ने भी ब्राह्मण सम्मलेन का आयोजन किया। इसी मुद्दे पर एक टीवी डिबेट के दौरान बसपा प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा नेता कहते हैं कि ब्राह्मण कहां जाएगा। इसके जवाब में भाजपा नेता ने कहा कि बसपा के नेता कंबल ओढ़ पर दूध पी रहे हैं।
न्यज 24 पर आयोजित डिबेट शो के दौरान एंकर मानक गुप्ता के सवाल के जवाब में बसपा प्रवक्ता डॉ एम एच खान ने कहा कि जानबूझ कर उत्तरप्रदेश में करीब 70-80 ब्राह्मणों के मकान गिरा दिए गए। भाजपा के एक नेता ब्राह्मणों को गाली दे रहे हैं और कह रहे हैं कि ससुरा जाएगा कहां। आप ब्राह्मण समाज को गाली बकेंगे, ब्राह्मण समाज इतना मुर्ख है कि कहीं जा ही नहीं सकता है। साथ ही बसपा प्रवक्ता ने कहा कि जबकि हमने ब्राह्मण सम्मेलन को प्रबुद्ध समाज गोष्टी का नाम दिया है और उसी पर हमारे नेता सतीश मिश्रा भी चल रहे हैं।
बसपा नेता के इस बयान पर भाजपा प्रवक्ता के के शर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि अभी तक जितने भी सपा और बसपा के प्रवक्ताओं को बुलाया गया वे खुलेआम ब्राह्मण सम्मेलन तो कर रहे हैं लेकिन टीवी में जब भी बात करनी होती है तो उससे कन्नी काट रहे हैं। इसी को कहते हैं कि कंबल ओढ़ कर दूध पीना। इसलिए इनकी चालाकी को उत्तरप्रदेश की जनता समझती है। रही बात भाजपा कि तो बीजेपी का साफ़ मानना है कि जातिवाद, परिवारवाद, तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार को त्याग कर उत्तरप्रदेश की जनता विकासवाद की तरफ बढ़ चुकी है।
बता दें कि उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव की आहट से पहले ही सभी पार्टियों ने ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के लिए हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए हैं। मायावती की पार्टी बसपा ने ब्राह्मणों को साधने के लिए अयोध्या में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन के दौरान बसपा सांसद सतीश मिश्रा ने ब्राह्मणों के एनकाउंटर का मुद्दा जोर-शोर से उठाया और कहा कि जितने ब्राह्मणों की हत्या हुई उससे प्रदेश के ब्राह्मण सबक ले।
उत्तरप्रदेश में लंबे समय तक सत्ता की कमान ब्राह्मण मुख्यमंत्रियों के हाथ में रही है। आजादी के बाद करीब 23 साल प्रदेश में मुख्यमंत्री पद पर ब्राह्मण नेता काबिज रहे। उत्तरप्रदेश में करीब 12 फीसदी ब्राह्मण हैं. 2017 के चुनाव में भाजपा के 312 विधायकों में कुल 58 ब्राह्मण विधायक चुने गए और राज्य मंत्रिमंडल में करीब 9 मंत्री इस समुदाय से आते हैं। 12 फीसदी वोट होने के कारण अधिकांश पार्टियां इस समुदाय को अपने पक्ष में करना चाहती है। इसलिए इस तरह के सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।
