पश्चिम बंगाल में बृहस्पतिवार को अच्छा-खासा सियासी हंगामा तब खड़ा हो गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के कोलकाता स्थित दफ्तर में छापेमारी करने पहुंच गई। जांच एजेंसी ने जैसे ही छापेमारी शुरू की, थोड़ी ही देर में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद I-PAC के दफ्तर में आ गईं। इसके बाद ममता बनर्जी ने केंद्र पर हमला बोल दिया।

ऐसे में जानना जरूरी होगा कि कौन हैं I-PAC के सह-संस्थापक प्रतीक जैन जिनके लिए ममता बनर्जी केंद्र सरकार से भी भिड़ गई हैं। भारतीय राजनीति में पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों में प्रतीक जैन का नाम प्रमुख है।

प्रतीक जैन ने 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के ‘वार रुम’ में अहम भूमिका निभाने के बाद 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का डिजिटल और जमीनी विमर्श तैयार करने से लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी के लिए काम किया।

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प्रतीक जैन मौजूदा वक्त में टीएमसी के प्रमुख रणनीतिकार हैं, जिन्हें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से अपनी पार्टी का आईटी प्रभारी बताया है। जैन के साथ काम करने वाले लोग कहते हैं कि धैर्य उनके लिए सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक हथियार है।

प्रशांत किशोर की टीम का हिस्सा थे जैन

साल 2013 में जब बीजेपी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की तैयारी कर रही थी, तब जैन उस वक्त चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली मुख्य टीम का हिस्सा थे। झारखंड में जन्मे जैन ने 2008 में आईआईटी मुंबई में दाखिला लिया और मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग एंड मेटीरियल साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की। जैन का प्रारंभिक करियर राजनीति से बिल्कुल अलग था।

एक निजी बैंक में ट्रेनी के रूप में काम करने के बाद, उन्होंने 2012 से एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में डेटा एनालिस्ट के रूप में काम किया। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद, जैन ने I-PAC की सह-स्थापना की और इसे चलाने वाले प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे।

I-PAC के चेहरे प्रशांत किशोर की तुलना में वह कम चर्चित रहे लेकिन ईडी की ताजा छापेमारी के बाद उनका नाम मीडिया में काफी चर्चित हो गया है।

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