विधानसभा चुनावों में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की हार का साइड-इफेक्ट पश्चिम बंगाल में बीजेपी की रथयात्रा पर पड़ सकता है। बीजेपी रथ के सहारे प्रदेश में अपनी मौजूदगी कायम करने की जद्दोजहद में लगी है। लेकिन, पहले ही कानूनी पचड़े में फंसी रथयात्रा चुनाव नतीजों के बाद और पस्त हो सकती है। ‘द टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल में बीजेपी के कार्यकर्ता चुनाव नतीजों से बेहद आहत हैं। स्थानीय नेता मानते हैं कि हिंदी भाषी राज्यों में बीजेपी की हार का असर उनकी रथ यात्रा पर पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक कोलकाता स्थित पार्टी दफ्तर में एक नेता ने बताया कि रथ यात्रा में वे लोग शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह और वसुंधरा राजे को आमंत्रित करने वाले थे, लेकिन अब उनके आने पर संशय है और वैसे भी हारे हुए नेताओं को यात्रा में भला कौन देखना चाहेगा। उन्होंने बताया कि रथ यात्रा का कानूनी पचड़े में फंसना और ऊपर से विधानसभा चुनावों में हार पश्चिम बंगाल में पार्टी के लिए सही तस्वीर पेश नहीं कर रही। कोलकाता स्थिति पार्टी के नेताओं का कहना है कि हार के बाद हो सकता है कि पार्टी की सेंट्रल लीडरशिप फिर से अपना ध्यान हिंदी-भाषी राज्यों में लगा दे। अगर ऐसा होता है तो रथ यात्रा की रफ्तार धीमे पड़ सकती है।

एक तरफ मंगलवार को जहां कोलकाता के बीजेपी दफ्तर में मायूसी थी, वहीं कांग्रेस दफ्तर में जश्न का माहौल देखा गया। पार्टी के लोग उत्साहित थे। टेलिग्राफ के मुताबिक कांग्रेस के नेताओं ने मोदी की उस मुहिम पर तल्ख टिप्पणी की जिसमें उन्होंने ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का आह्वान किया था। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सोमने मित्रा ने कहा कि लोगों ने पीएम मोदी की कांग्रेस मुक्त भारत की अपील को खारिज कर दिया है। वहीं, एक दूसरे नेता ने कहा कि नए चुनाव परिणाम से हो सकता है कि बंगाल में इसका खास असर नहीं हो, लेकिन हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस की वापसी एक अच्छा संकेत है।

पांच राज्यों मे हुए विधानसभा चुनाव का फाइनल नतीजा

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