Vaishno Devi Medical College Controversy: राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद यानी एनएमसी ने श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) की एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए दी गई अनुमति को वापस लेने का फैसला लिया तो ये एक नए राजनीतिक टकराव की वजह बन गया। जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने इसे शिक्षा का “सांप्रदायिकरण” बताते हुए केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी की तीखी आलोचना की है।

दरअसल, मंगलवार को राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद ने संस्थान को शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए MBBS पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए जारी किया गया एलओपी वापस ले लिया। कॉलेज ने इस पाठ्यक्रम के तहत 50 छात्रों को प्रवेश दिया था, जिनमें से अधिकांश कश्मीरी मुस्लिम थे, जिनका प्रवेश एनईटी परीक्षा में उनके प्रदर्शन के आधार पर किया गया था।

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महबूबा मुफ्ती ने जताई फैसले पर आपत्ति

एनएमसी के इस फैसले ने राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है, जिसके चलते केंद्र शासित प्रदेश के नेताओं ने गंभीर परिणाम होने की चेतावनी भी दी। बता दें कि कॉलेज में मुस्लिम छात्रों के प्रवेश को लेकर बीजेपी और कई दक्षिणपंथी गुटों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस मुद्दे पर पूर्व सीएम और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह फैसला शिक्षा के सांप्रदयिकरण और उसके खतरनाक अंजाम को उजागर कर रहा है।

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि बीमारी का इलाज करने के बजाय, मरीज को बिना किसी गलती के दंडित किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि यदि एसएमवीडी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ ऐसा किया जा सकता है, तो इसे अन्य जगहों पर भी दोहराया जा सकता है, जिससे मेहनती युवाओं का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ जाएगा।

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अब्दुल्ला सरकार पर उठा दिए सवाल

इसके अलावा महबूबा मुफ्ती ने राज्य की उमर अब्दुल्ला सरकार पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला बीजेपी द्वारा धार्मिक आधार पर प्रवेश प्रतिबंधित करने की मांगों के मद्देनजर लिया गया है, जो इसे और भी भयावह बनाती है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से हमारे मुख्यमंत्री भी इस निर्णय से सहमत प्रतीत होते हैं जिससे गंभीर संदेह और चिंताजनक स्थितियां आ सकती हैं।

‘हजार साल पीछे जाना चाहता है नेतृत्व’

दूसरी ओर सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और मंत्री जावेद राणा ने इस फैसला को लेकर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि यह एक लोकतांत्रिक देश के लिए अच्छा मुद्दा नहीं है। अगर हम यह कहें कि शिक्षण संस्थानों में प्रवेश धर्म या क्षेत्र के आधार पर होना चाहिए, तो यह एक स्वस्थ समाज के लिए हानिकारक है। अब्दुल्ला सरकार में मंत्री राणा ने कहा कि हमने मंदिरों और मस्जिदों को लेकर राजनीति होते देखी है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज हम प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिले के लिए धर्म या क्षेत्र के आधार पर बात कर रहे हैं। हम अपने समाज को किस दिशा में ले जा रहे हैं? देश का नेतृत्व हमें हज़ार साल पीछे ले जाना चाहता है, जबकि विकसित समाज हज़ार साल के भविष्य के बारे में सोचते हैं।

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इसके अलावा एनसी के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि यह कदम शिक्षा के प्रति बीजेपी के लापरवाह और असंवेदनशील रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में शायद यह पहला मामला है, जहां सांप्रदायिक रूप से विभाजनकारी पार्टी एक मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने का जश्न मना रही है। यह व्यवहार में एक भयावह स्थिति है और जम्मू के लोगों के लिए एक दुखद क्षण है।

श्रीनगर के मेयर ने भी केंद्र को घेरा

श्रीनगर के पूर्व मेयर जुनैद अज़ीम मट्टू ने इसे “सांप्रदायिक आवाज़ों को खुश करने के लिए प्रतिगामी कदम बताया। उन्होंने कहा कि जम्मू में दक्षिणपंथी दलों द्वारा इस प्रतिगामी, बेशर्म और पिछड़े कदम का जश्न मनाया जाना ही यह बताने के लिए काफी है कि क्या हुआ है और क्यों? इसे समावेशिता, समानता और निष्पक्षता की हत्या बताते हुए मट्टू ने कहा कि यह निर्णय जम्मू को खुश करने के लिए लिया गया है।

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उन्होंने कहा कि नियामक उपाय’ के रूप में प्रस्तुत किया गया यह राजनीतिक निर्णय हमारे इतिहास में हमारे संविधान, हमारी सभ्यता और भारत की अवधारणा पर एक कलंक के रूप में दर्ज किया जाएगा। उन्होंने पूछा कि आखिर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के कंधे से गोली चलाई गई है, लेकिन हम जानते हैं कि गोली किसने चलाई और क्यों चलाई गई है।

बीजेपी नेता बोले- अन्य कॉलेजों में मिलेगा प्रवेश

बीजेपी नेता और विधायक आर.एस. पठानिया ने फेसबुक पर पोस्ट किया कि एनएमसी ने आवश्यक मानकों को पूरा न करने के कारण एसएमवीडीआईएमई में एमबीबीएस की 50 सीटों की अनुमति रद्द कर दी है। इससे गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि होती है। प्रभावित सभी छात्रों को अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के कॉलेजों में आरक्षित सीटों पर सुचारू रूप से स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

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