पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले तृणमूल कांग्रेस 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद गिराए जाने की बरसी पर एक बड़ी रैली करने वाली है। सूत्रों के मुताबिक TMC का माइनॉरिटी सेल आम तौर पर हर साल यह रैली करता है, लेकिन इस बार पार्टी की टॉप लीडरशिप ने इसकी ज़िम्मेदारी अपने स्टूडेंट्स और यूथ विंग्स को दी है।
ममता बनर्जी भी रह सकती मौजूद
रैली महात्मा गांधी की मूर्ति पर होगी, जहां पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेशनल जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी के सभा को संबोधित करने की उम्मीद है। इस साल माइनॉरिटी सेल को चार्ज क्यों नहीं दिया गया, इस पर TMC के स्पोक्सपर्सन जयप्रकाश मजूमदार ने कहा, “यह पूरी तरह से एक ऑर्गेनाइज़ेशनल फ़ैसला है।”
TMC सूत्रों के मुताबिक इस साल कोशिश है कि रैली को सिर्फ़ एक पॉलिटिकल इवेंट के तौर पर नहीं, बल्कि एकजुटता और सांप्रदायिक एकता का मैसेज देने की एक पहल के तौर पर पेश किया जाए। पार्टी के नेता और मंत्री अपने भाषणों में इस मैसेज को हाईलाइट करेंगे और कम्युनलिज़्म का विरोध करने की अहमियत पर ज़ोर देंगे।
TMC के एक सीनियर लीडर ने कहा, “हमें एहसास हो रहा है कि बिहार ने हमें एक सबक दिया है। SIR कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। यह ज़्यादातर लोगों का मुद्दा है। SIR के बाद जिनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं होगा, उन पर असर पड़ेगा, लेकिन वह हिस्सा वोट नहीं दे पाएगा। इसलिए हमें अपनी बात बदलनी होगी। BJP ने SIR के साथ अपने कम्युनल कैंपेन को तेज़ कर दिया है, जिससे डर का माहौल फैल रहा है।”
TMC नेता ने कहा, ” हम इसका मुकाबला करेंगे ताकि एक सेक्युलर वोट बैंक हमारी तरफ़ आए। उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ की बरसी कम्युनल सद्भाव का मैसेज फैलाने का एक सही दिन है। रैली से पहले और बाद में हम असर डालने की कोशिश कर रहे हैं ताकि हम इसका इस्तेमाल ज़मीनी लेवल पर अपना चुनावी कैंपेन शुरू करने के लिए कर सकें।”
बीजेपी ने साधा निशाना
विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने रैली प्लान पर रिएक्शन देते हुए कहा, “हम आसानी से समझ सकते हैं कि TMC 6 दिसंबर को एक बड़ी रैली क्यों कर रही है, वे इस रैली से किस कम्युनिटी को खुश करना चाहते हैं। बंगाल के लोग चुनाव में TMC को इसका जवाब देंगे।”
TMC के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, “संहति दिवस (6 दिसंबर) तृणमूल के लिए न सिर्फ कम्युनल सद्भाव का मैसेज देने का दिन है, बल्कि BJP की धर्म की पॉलिटिक्स के खिलाफ आवाज उठाने का भी एक स्ट्रेटेजिक दिन है। पार्टी ने सेक्युलरिज्म, सोशल सद्भाव, डेमोक्रेटिक राइट्स और कम्युनल पोलराइजेशन के खिलाफ एक मजबूत मैसेज दिया है। तृणमूल एक बड़ी गैदरिंग करना चाहती है। इस बार स्टूडेंट-यूथ ऑर्गनाइजेशन इस रैली को ऑर्गनाइज करने में एक बड़ी भूमिका निभाएगा।”
