सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तीन जजों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बिहार सरकार को अनुमति दे दी है। बिहार सरकार को निचली अदालतों के इन तीनों जजों की बर्खास्तगी पर फैसला लेना हैं। बता दें कि तीनों जजों पर आरोप है कि वह साल 2013 में नेपाल एक एक गेस्ट हाउस में महिलाओं के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़े गए थे। आरोपी जजों में एक फैमिली कोर्ट के मुख्य जज, एक चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट और एक एड हॉक एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज शामिल हैं।

बता दें कि इस मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब नेपाल के एक स्थानीय अखबार में यह खबर छपी कि नेपाल पुलिस ने जजों को एक गेस्ट हाउस में महिलाओं के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़ था। इसके बाद पटना हाईकोर्ट ने इस रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। एक डिस्ट्रिक्ट और एक सेशन जज को उस जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि जांच रिपोर्ट में कहा गया कि तीनों जज भारत में ही थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नेपाल के स्थानीय अखबार ने भी यह स्वीकार किया कि उनकी खबर गलत थी और एक माफीनामा भी प्रकाशित किया। हालांकि हाईकोर्ट इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुआ और इस मामले में गृह मंत्रालय से जांच कर सच्चाई का पता लगाने का निर्देश दिया।

गृह मंत्रालय ने अपनी जांच में पता लगाया कि आरोपी जजों के फोन 26-27 जनवरी, 2013 के दौरान स्विच ऑफ थे और जब वो एक्टिव हुए तो उनकी लोकेशन नेपाल सीमा के नजदीक फोर्ब्सगंज कस्बे में ट्रेस हुई। इससे पता चला तीनों आरोपी जज अपनी पोस्टिंग वाली जगह छोड़कर नेपाल में साथ थे। इसके बाद पटना हाईकोर्ट ने एक प्रस्ताव पास कर सरकार को बिना अनुशासनात्मक सुनवाई कराए तीनों आरोपी जजों को बर्खास्त करने को कहा।

इस पर आरोपी जजों ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और कहा कि बिना अनुशासनात्मक सुनवाई के उन्हें बर्खास्त नहीं किया जा सकता। इस पर साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को स्टे कर दिया। अब जस्टिस इंदु मल्होत्रा और संजीव खन्ना की बेंच ने अपने एक फैसले में हाईकोर्ट के फैसले पर लगे स्टे को हटा लिया है। इसके बाद राज्य सरकार के आरोपी जजों के खिलाफ कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो गया है।