SIR Voter List: चुनाव आयोग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इसके साथ ही जिन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही थी, उन सभी का भी ड्राफ्ट रिलीज हो चुका है। जब चुनाव आयोग ने SIR की घोषणा की थी, तो मतदाताओं की कुल संख्या 50 करोड़ थी लेकिन एसआईआर के बाद रिलीज ड्राफ्ट में वोटरों की संख्या करीब 6 करोड़ घटकर 44.40 करोड़ रह गई है।
अहम बात यह है कि यूपी में तीन बार एसआईआर ड्राफ्ट रिलीज होने की तारीख को टाला गया। ड्राफ्ट के मुताबिक, यूपी में वोटरों की कुल संख्या में लगभग 19 प्रतिशत की कमी आई है, जो कि 15.44 करोड़ से घट कर 12 करोड़ हो गये। इसमें अनुपस्थित स्थानांतरित हुए मतदाताओं के कारण 14.06% मतदाता सूची से नाम हटाए गए 1.65% मतदाता एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत थे और 2.99% मतदाताओं की मृत्यु हो गई।
1.4 करोड़ वोटरों को भेजा जाएगा नोटिस
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने बताया कि ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल 12.55 करोड़ मतदाताओं में से 1.4 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजा जाएगा, क्योंकि उनकी मतगणना अभी पूरी नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को आज से नोटिस मिलना शुरू हो जाएगा। नोटिस में उन दस्तावेजों की सूची होगी जिन्हें वे मार्च में अंतिम सूची में शामिल होने के प्रमाण के रूप में जमा कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के मतदाताओं के पास अब एक महीने का समय है, जिसमें वे योग्य मतदाताओं के छूट जाने या अयोग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल हो जाने की स्थिति में आपत्ति और दावे प्रस्तुत कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च को प्रकाशित की जाएगी।
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12 राज्यों में एसआईआर का काम
चुनाव आयोग ने पिछले साल 27 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल, राजस्थान, गोवा, लक्षद्वीप, पुडुचेरी, गुजरात, तमिलनाडु , मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, केरल और उत्तर प्रदेश में एसआईआर के दूसरे दौर की घोषणा की थी। इन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का कारण यह है कि पिछले साल नवंबर में शुरू हुई एसआईआर के दौरान बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा मतदाताओं को अनुपस्थित या स्थानांतरित, कई स्थानों पर पंजीकृत या मृत के रूप में चिह्नित किया गया।
6 करोड़ से ज्यादा कटे नाम
राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मतदाताओं के अनुपस्थित होने या स्थानांतरित होने के कारण सबसे अधिक मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं। उत्तर प्रदेश में स्थानांतरित/अनुपस्थित मतदाताओं का प्रतिशत 14.06% था, जो सभी नौ राज्यों में सबसे अधिक है। गुजरात और तमिलनाडु में अनुपस्थित/स्थानांतरित होने के कारण 10% से अधिक मतदाता सूची से नाम हटाए गए। कुल मिलाकर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थानांतरित/नाम हटाए गए मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक 16.72% थी।
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केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में, जहां 2026 की पहली छमाही में विधानसभा चुनाव होने हैं, कुल हटाए गए मतों का प्रतिशत क्रमशः 8.64%, 7.6%, 15.18% और 10.12% था। फरवरी-मार्च में प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या में और भी नाम हटाए जा सकते हैं क्योंकि दावे और आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है, और चुनाव आयोग मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में भी दी गई थी एसआईआर को चुनौती
चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को देश भर में एसआईआर का आदेश दिया था, जिसकी शुरुआत बिहार से हुई, जहां विधानसभा चुनाव होने थे। एसएसआर के विपरीत एसआईआर में मतदाता सूचियों को नए सिरे से तैयार करना शामिल था, जिसमें सभी पंजीकृत मतदाताओं को एक निर्धारित समय सीमा के भीतर गणना डॉक्यूमेंट जमा करने के लिए कहा गया था, और कुछ कैटेगरी के मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने के लिए कहा गया था, जिसमें नागरिकता भी शामिल थी।
चुनाव आयोग के 24 जून के आदेश को कई याचिकाओं के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है, जिनमें चुनाव आयोग की शक्तियों और अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया की तुलना परोक्ष रूप से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) तैयार करने से की है।
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