केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों में भाग लेने पर लगा 58 साल पुराना बैन अब हटा दिया है। वहीं अब इसपर आरएसएस की प्रतिक्रिया सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस ने संघ के सूत्रों के हवाले से लिखा कि इसकी मांग संघ की ओर से नहीं की गई थी।
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) (जो केंद्र सरकार के कर्मियों से संबंधित मुद्दों को देखता है) ने 9 जुलाई को आरएसएस की गतिविधियों में सरकारी अधिकारियों की भागीदारी पर आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि इस संबंध में 1966, 1970 और 1980 में जारी निर्देश को हटाने का निर्णय लिया गया है।
डीओपीटी अब संबंधित कैबिनेट मंत्री के रूप में सीधे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के अधीन कार्य करता है। 1964 में केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम और अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम में कहा गया था कि कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी भी राजनीतिक दल या राजनीति में भाग लेने वाले किसी भी संगठन का सदस्य नहीं होगा, या अन्यथा उससे जुड़ा नहीं होगा। इसके बाद इन नियमों के तहत आरएसएस की गतिविधियों की स्थिति के बारे में स्पष्टीकरण मांगने के लिए कई आवेदन दायर किए गए।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को सवालों का सामना करना भी करना पड़ा था कि क्या वह संघ की गतिविधियों में शामिल होने वाले सरकारी कर्मचारियों पर प्रतिबंध हटाने की मांग करने जा रहे हैं? 1 दिसंबर 2014 को हरिद्वार में एक बैठक में मोहन भागवत ने कहा था, “हम सरकार से कोई मांग नहीं करने जा रहे। हम अपना काम कर रहे हैं। हमारा काम ऐसे किसी विरोध से नहीं रुकता।”
आरएसएस की गतिविधियों में शामिल होने वाले सरकारी कर्मचारियों पर प्रतिबंध हटाने वाली 9 जुलाई की सरकारी अधिसूचना के बारे में पूछे जाने पर आरएसएस प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने कहा, “यह निर्णय उचित है और भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करेगा।”
कांग्रेस ने जताया विरोध
इस फैसले पर कांग्रेस ने विरोध जताया है। बैन हटाए जाने की खबर पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकारी आदेश की एक कॉपी को ट्वीट किया और लिखा कि सरकार ने 58 साल पुराना बैन हटा दिया है।
