रामवीर तंवर ने गरीब बच्चों को शिक्षित करने के लिए अनूठी पहल शुरू की है। वे चार साल से गरीब बच्चों के लिए पुस्तकालय चला रहे हैं। उनकी पहल के कारण 250 से भी ज्यादा गांवों में पुस्तकालय खोले जा चुके हैं, जो मुफ्त हैं। रामवीर को ‘लाइब्रेरी मैन’ के नाम से जाना जाने लगा है। 33 साल के रामवीर ने बीटेक की पढ़ाई की है और नौकरी कर रहे हैं। उन्हें गरीब बच्चों के लिए पुस्तकालय खोलने का विचार वर्ष 2018 में आया। उन्होंने अपने गांव झुंडपुरा में देखा कि बच्चे पढ़ाई की तरफ नहीं, बल्कि नशे की चपेट में आ रहे हैं। गांव में बना पंचायत कार्यालय एक खंडहर में तब्दील हो रहा था, जो नशे का अड्डा भी बनता जा रहा था। इसे उन्होंने पुस्तकालय में बदल दिया।

रामवीर ने ‘मिशन हंड्रेड रूरल लाइब्रेरी’ नाम से अपने इस नए सफर की शुरुआत की। उन्होंने कुछ दिनों में ही एक सौ पुस्तकालय खोले। उसके बाद उन्होंने ग्राम पाठशाला बनाने का निर्णय लिया। ग्राम पाठशाला की शुरुआत अगस्त, 2020 में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के गनौली गांव में एक पुस्तकालय के निर्माण के साथ हुई।

गांव में सरकारी नौकरियां कर रहे युवाओं ने इस काम में उनकी मदद की। उन्होंने खंडहर पड़े पंचायत घर को ग्राम प्रधान की सहमति से अपने जिम्मे लिया। इसे अपने पैसे से एक नि:शुल्क आधुनिक पुस्तकालय में बदल दिया। यहां 67 बच्चों के बैठने की व्यवस्था की गई। इस पुस्तकालय में धीरे-धीरे बच्चों की भीड़ लगने लगी। इसके बाद आसपास के गांवों में पुस्तकालय खोलने का अभियान शुरू किया गया।

इस अभियान में जुटे लोगों का न तो कोई औपचारिक संगठन है और न ही कोई एनजीओ है। ये कुछ उच्च शिक्षित और सफल लोगों का समूह है। टीम के ज्यादातर सदस्य नौकरी-पेशा हैं, जो सरकारी या निजी क्षेत्र की नौकरियां करते हैं। इनमें प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, अध्यापक, चिकित्सक, इंजीनियर और खिलाड़ी शामिल हैं। इस संगठन में न तो कोई पद है और न ही कोई पदाधिकारी है। टीम ग्राम पाठशाला के लोगों का संकल्प है कि जब तक देश के हर गांव में पुस्तकालय नहीं बन जाता, तब तक कोई भी छुट्टी के दिन अपने घर पर नहीं रहेगा।

इसी का परिणाम रहा कि गांवों के इन लोगों को काफी समर्थन मिल रहा है। टीम ग्राम पाठशाला की प्रेरणा से अभी तक उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा के 250 से भी ज्यादा गांवों में पुस्तकालय बन चुके हैं। टीम ग्राम पाठशाला की खासियत यह है कि ये किसी भी तरह के आर्थिक लेनदेन में शामिल नहीं होती है। इसका काम केवल गांव के लोगों को पुस्तकालय निर्माण के लिए प्रेरित करना है। टीम के सदस्य हर छुट्टी के दिन गांव-गांव जाते हैं और जन-जागरण के उद्देश्य से पैदल यात्रा, साइकिल यात्रा करके लोगों के साथ बैठकें करते हैं। इस बैठक में लोगों को पुस्तकालय का महत्व समझाया जाता है। फिलहाल ग्राम पाठशाला की टीम में करीब 250 लोग सक्रिय काम कर रहे हैं।