Education

विशेष: इधर चिंता, उधर ममता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस कह चुके हैं कि कोविड-19 महामारी ने इतिहास में शिक्षा के क्षेत्र में अब तक का सबसे लंबा अवरोध पैदा किया है, जिससे सभी देशों और महाद्वीपों के करीब 1.6 अरब छात्र प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा 2.38 करोड़ बच्चे अगले साल स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ सकते हैं।

चौपाल: विवेक की शिक्षा

सही मायने में अच्छी शिक्षा मानवता और समाज कल्याण की बात करती है, हमें धर्मांधता से दूर करती है। लेकिन आज हमारे बीच ऐसा कुछ भी नहीं है। राजनीति का होना सही है, लेकिन एक सीमा तक।

वक्त की नब्ज: जड़ों से जुड़ने की शिक्षा

नई श्क्षिा नीति में भारतीय बच्चों को भारतीय बनाने की कोशिश है और इसकी जितनी तारीफ की जाए कम होगी। मातृभाषा में प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाई कराने का सुझाव है, जो आवश्यक भी है और महत्त्वपूर्ण भी, क्योंकि फिलहाल इस देश के अधिकतर बच्चे बेजुबान बन कर निकलते हैं स्कूलों से।

शिक्षा: गांधी से सीख

सत्य को ईश्वर मानने वाले गांधी को हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं थी। ऐसा न करने से ही उनके जीवन का रास्ता अन्य से अलग हो गया। गांधी जीवन भर इसी पथ पर चलते रहे और अपना उदाहरण रख कर असंख्य लोगों को आकर्षित करने में सफल हुए।

Rajasthan RBSE Supplementary Exam 2020 datesheet: जारी हुई 10वीं 12वीं सप्लीमेंट्री एग्जाम डेटशीट, यहां से करें डाउनलोड

RBSE Rajasthan Board Supplementary Exam 2020 Datesheet: 10वीं की अंतिम पूरक परीक्षा 08 सितंबर को सामाजिक विज्ञान की होगी तो 12वीं की अंतिम परीक्षा मनोविज्ञान विषय और दोपहर की शिफ्ट में संगीत विषय की होगी।

दुनिया मेरे आगे: बोझ का हासिल

सही है कि हरेक माता-पिता यह चाहते हैं कि उनके बच्चों का भविष्य स्वर्णिम हो और उनके बच्चे ऐसा मुकाम हासिल करें जो उनके भविष्य को सुखद बनाने के साथ साथ समाज में एक दृष्टांत बने।

विशेष: नीति और शिक्षा की मातृभाषा

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की घोषणा ने देश में कोरोना संकट के बीच एक सकारात्मक विमर्श को जन्म दिया है। इस नीति के साथ जहां शिक्षा का सवाल फिर से केंद्र में आ गया है, वहीं इसमें जिस तरह मातृभाषा को अहमियत दी गई है उससे भारतीय भाषाओं के उन्नयन का एक सर्वथा नया दौर शुरू हो सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति की प्रस्तावना और प्रावधानों पर आज का विशेष

संपादकीय: वक्त की बर्बादी

दरअसल, एमफिल पाठ्यक्रम लागू करने के पीछे मकसद था कि विद्यार्थियों को पहले शोध की सही प्रविधि सिखाई जाए। इससे उनमें वैज्ञानिक तरीके से शोध करने का कौशल विकसित होगा। इस पाठ्यक्रम की अवधि दो साल रखी गई थी। उसके बाद तीन साल शोध के लिए। हालांकि कुछ साल पहले तक सभी विश्वविद्यालय एमफिल पाठ्यक्रम नहीं चलाते थे। पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इसे अनिवार्य करने को कहा, तो लगभग सभी जगह यह लागू हो गया। एमफिल में विद्यार्थी को शोध प्रविधि की पढ़ाई करने के बाद एक लघु शोध प्रबंध जमा करना होता है।

सरकारी स्कूल के गरीब बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई टेढ़ी खीर, कई बच्चों के पास मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर नहीं

शिक्षकों के मुताबिक जब तक बच्चे सीधे तौर पर कक्षा से नहीं जुड़ पाएंगे तब तक उनको वास्तविक अध्ययन देने में परेशानी होगी। ऑनलाइन तैयार किए गए गु्रप में भी चंद बच्चे ही सक्रिय हो पा रहे हैं बाकि बच्चे तकनीकी परेशानियां बता रहे हैं, जो इन कक्षाओं की सफलता की राह में रोड़ा बन रही है।

दुनिया मेरे आगे: ज्ञान के पायदान

विज्ञान से भी परे है प्रज्ञान। अज्ञान, ज्ञान, विज्ञान और प्रज्ञान! इस ज्ञान यात्रा के चौथे और लक्षित पड़ाव तक ले जाने के लिए हमारी अज्ञान अवस्था में हमें किंवदंतियों से समझाया जाता था, क्योंकि तब हमारे पास ज्ञान का अभाव था और बहुत सारी बातें हमारी समझ से परे हो सकती थीं। हम ज्ञान के युग में पहुंचे, हम ज्ञानी होने के भाव में जीने लगे।

UPSC क्रैक करने से पहले 30 परीक्षाओं में हुए थे फेल, 20 घंटे पढ़ाई की; ऐसी है IPS आदित्य की सक्सेस स्टोरी

UPSC क्रैक करने से पहले आदित्य 30 परीक्षाओं में फेल हुए थे। लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और परीक्षा की तैयारी करते रहे। आइए जानते हैं IPS आदित्य की सक्सेस स्टोरी से जुड़ी तमाम जानकारी-

चौपाल: शिक्षा की सूरत

सेव द चिल्ड्रन संस्था का कहना है कोरोना महामारी के बाद सबसे विषम परिस्थिति शिक्षा के क्षेत्र में खड़ी होगी। संस्था का मानना है कि मानव इतिहास में पहली बार वैश्विक स्तर पर बच्चों की एक पूरी पीढ़ी की शिक्षा से बाधित होगी।

दुनिया मेरे आगे: रुचियों का पाठ

मैं जिन हालात में जी रहा था, उनमें वे बाल पत्रिकाएं मेरे लिए जीवन का आधार थीं। मैं उनके बिना अपना दिन-रात अधूरा समझता था। स्कूली किताबों के समांतर मैं उन्हीं में खोया रहता था। एक-एक शब्द ऐसे पढ़ता बारंबार, जैसे कोई प्यासा अपनी अतृप्त प्यास बुझा रहा हो।

कभी करते थे रेलवे ट्रैक पर गैंगमैन की नौकरी, अब IPS प्रहलाद सहाय के नाम से कांपते हैं अपराधी, जानिये सक्सेज स्टोरी

IPS Success Story: प्रहलाद सहाय ओड़िशा में रेलवे ट्रैक पर गैंगमैन की नौकरी करते थे और पटरियों की देखभाल और मरम्मत का काम करते थे। लेकिन आज वह ओड़िशा में ही आईपीएस अधिकारी हैं।

दुनिया मेरे आगेः होड़ के बादलों में

आज अंकों की होड़ में बच्चों की सृजनशीलता खत्म हो रही है। बच्चा सिर्फ पाठ्यपुस्तक की सामग्री तक सीमित कर दिया गया है। वह वही उत्तर देता है जो शिक्षक चाहते हैं। बच्चा क्या बनना चाहता है, इस पर परिवार ध्यान नहीं दे रहे हैं।

मां दूसरों के घर बनाती थीं रोटियां, पिता ढोते थे ईंट; बेटा 22 की उम्र में बना IPS, जानिए साफिन हसन की सक्‍सेज स्‍टोरी

IPS Safin Hasan Success Story: साफिन हसन UPSC से पहले गुजरात पीएससी परीक्षा में भी बैठे थे और 34वीं रैंक हासिल की थी। जिसके बाद उन्हें जिला रजिस्ट्रार की नौकरी भी मिली थी, लेकिन…

JNU की आदिवासी महिला प्रोफेसर सोनाझरिया मिंज बनीं वीसी, आज भी याद है कि टीचर ने कहा था- ‘तुमसे न हो पाएगा’

झारखंड की पहली महिला राज्यपाल और राज्य के विश्वविद्यालयों की कुलपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य के चार विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्रतिकुलपति की नियुक्ति की है। सभी नियुक्तियां झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश एचसी मिश्र की अध्यक्षता में बनी सर्च कमेटी की सिफारिश और सीएम हेमंत सोरेन की सहमति पर हुई हैं।

Coronavirus Lockdown: नोएडा DM की बड़ी राहत, छात्रों को नहीं देनी कोई Fees, इन राज्य सरकारों ने भी लिया फैसला

Coronavirus Lockdown in India Latest News Update: आगे कहा गया कि, जो माता-पिता लॉकडाउन के दौरान फीस जमा नहीं कर सकते, उनके बच्चों की ऑनलाइन क्लासेस पर इसका कोई असर नहीं होना चाहिए।

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