Education

ऑनलाइन शिक्षा और चुनौतियां

इसमें कोई शक नहीं कि शिक्षा हासिल करने की इच्छा रखने वाली आबादी का बड़ा हिस्सा गरीब तबके से है। इनमें शहरी और ग्रामीण गरीब दोनों हैं। कंप्यूटरों की कमी और इंटरनेट की सुविधा का अभाव आॅनलाइन शिक्षा में बड़ी बाधा के रूप में उभरा है। नेटवर्क जैसी तकनीकी समस्या भी इसमें रोड़ा साबित हुई है। आॅनलाइन परीक्षाओं के आयोजन
में भी अड़चनें कम नहीं हैं।

एयूडी-दिल्ली

आंबेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली (एयूडी) के व्यापार, सार्वजनिक नीति और सामाजिक उद्यमिता स्कूल ने शैक्षणिक सत्र 2021 में मास्टर आॅफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी एमबीए में दाखिले के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।

कमियों को दूर करके ही जीवन में पाई जा सकती है सफलता

कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। यानी कुछ आदतें, बातें और चीजें यह बताती हैं कि कोई व्यक्ति भविष्य में सफल हो गया नहीं।

नर्सरी में दाखिले की दौड़: स्कूलों की मनमानी से अभिभावक पस्त

दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी के स्कूलों को नर्सरी में दाखिल के लिए उम्र सीमा में बच्चों को 30 दिन की छूट देने का निर्देश दिया है। शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने स्कूलों को भेजे एक पत्र में कहा हैै कि न्यूनतम एवं अधिकतम उम्र सीमा में प्रधानाध्यापकों के स्तर से 30 दिन की छूट दी जा सकती है।

राजनीति: शिक्षा का अर्थशास्त्र

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हमारा देश काफी तरक्की कर चुका है। लेकिन अठारह से तेईस साल के विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर की स्थिति को देखें तो उच्च शिक्षा की यह तस्वीर निराशाजनक है, क्योंकि अठारह से तेईस साल के विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर 24.5 प्रतिशत है, जबकि 2011 की जनगणना के अनुसार तिहत्तर प्रतिशत व्यक्ति साक्षर हैं।

व्यक्तित्व,रश्मि सावंत : अंतरराष्ट्रीय छात्र राजनीति में भारतीय चेहरा

रश्मि सावंत विश्वविद्यालय के लिनाक्रे कॉलेज से ऊर्जा प्रणाली विषय पर एमएससी कर रही हैं। इस हफ्ते की शुरुआत में हुए चुनाव में उन्होंने 3,708 मतों में से 1,966 मत हासिल कर शानदार जीत दर्ज की।

विशेषज्ञ की कलम से : ‘स्टेम शिक्षा’ से भविष्य की राह होगी आसान

करिअर निर्माण में ‘स्टेम शिक्षा’ (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) असीमित अवसरों को प्रदान करने वाले क्षेत्र के तौर पर तेजी से उभर रहा है। अब देश में पुरानी शिक्षा प्रणाली को पीछे छोड़ इक्कीसवीं शताब्दी के लिए आवश्यक कौशल से विद्यार्थियों को लैस किए जाने पर बल दिया जा रहा है जो रचनात्मकता, महत्त्वपूर्ण सोच और नवीनता को बढ़ावा देने वाले हैं।

दिल्‍ली मेरी दिल्‍ली

दिल्ली विश्वविद्यालय में कुलपति योगेश त्यागी की बर्खास्तगी के बाद पद पर बैठे कार्यवाहक कुलपति पीसी जोशी ने हाल ही में अपने छह महीने के कार्यकाल में किए कार्यों का लेखा जोखा प्रस्तुत किया।

जरूरी जानकारी: जेईई मुख्य के आवेदन फॉर्म में शनिवार तक सुधार संभव

संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) मुख्य के आवेदन फॉर्म में सुधार की प्रक्रिया आज शुरू हो गई है जो 30 जनवरी तक जारी रहेगी। जो उम्मीदवार उनके द्वारा दी गई जानकारी में बदलाव करना चाहते हैं, वे अपने फॉर्म को संपादित कर सकते हैं।

परामर्श: सफलता हासिल करने के लिए जीवन में कठिन सबक जरूरी

हम अकसर केवल सीखने के कौशल पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो हमारी नौकरियों के लिए सीधे प्रासंगिक हैं। दूसरी ओर, अमीर और सफल लोग, कभी भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचने और नए कौशल सीखने से नहीं रुकते हैं, भले ही उनके शिक्षक या बॉस उन्हें इस बारे में नहीं बत रहे हों।

विशेषज्ञ की कलम से: रेडियो जॉकी का जादू

अज हम रेडियो को अगर देखें तो वो केवल सुनने का एक मात्र जरिया नहीं रह गया है, आज रेडियो में ग्लैमर आ चुका है जिसकी चकाचौंध रौशनी से नई पीढ़ी अछूती नहीं है। ये ठीक उसी तरह का अहसास देती है, जैसे की संगीत, कैमरा और एक्शन की जिंदगी होती है। संगीत के प्रति लोगों में बढ़ती हुई दीवानगी को आज रेडियो उद्योग ने युवाओं के लिए बेहतर विकल्प बना दिया है।

शिक्षक ही समाज का सृजनकर्ता : राजीव कुमार

किसी भी समाज के निर्माण में शिक्षक की अहम भूमिका होती है क्योंकि शिक्षक ही समाज को सही दिशा देने की क्षमता रखता है। अपनी सृजनात्मक क्षमता के जरिये वह न केवल समाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता हैं बल्कि नवाचारों को स्थापित कर नए शैक्षिक वातावरण का निर्माण भी कर सकता है।

अध्ययन और शिक्षण का मुक्ताकाश

भारत जैसे देश में बढ़ती आबादी के अनुसार स्कूल-कॉलेज, विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान खोल पाना सरकारों के लिए चुनौती बनता गया है। इस दिशा में निजी प्रयासों को बढ़ावा देने के बावजूद सभी को अच्छी शिक्षा सुलभ कराना संभव नहीं हो पा रहा।

द्वार अनुभव का राह संभावना की

ऑनलाइन शिक्षण के साथ वेबिनार के चलन को लेकर इसके पक्ष और विपक्ष दोनों में विद्वानों की राय देखी-सुनी जा रही है। जो लोग इसे नई संभावना के रूप में देख रहे हैं, उन्हें इससे आने वाले दिनों में शिक्षण व्यवस्था के सुगम होने की उम्मीद दिखाई देती है।

समय भारी संवाद जारी

कोरोना संक्रमण के दौर में मनुष्य और समाज ने ऐसे कई अनुभव अर्जित किए, जो अपूर्व थे। इस दौरान घरों के किवाड़ जरूर बंद रहे पर अभिव्यक्ति ने अपने लिए नए रास्ते खोज निकाले।

वक्त की नब्ज: शिक्षा और स्वास्थ्य के मोर्चे पर

माना कि बिजली, पानी, सड़क, रोजगार भी अति-महत्त्वपूर्ण हैं, लेकिन उन पर ध्यान थोड़ा बहुत तो दिया गया है शुरू से। अभाव रहा है स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्रों में और जब तक इन क्षेत्रों में सुधार नहीं लाए जाते हैं तब तक भारत की गाड़ी अशिक्षा और गुरबत के कीचड़ में अटकी रहेगी और देश का भविष्य रोशन नहीं दिखेगा।

परामर्श: अपने सभी कार्य एक साथ करने की कोशिश न करें

हम सभी हर दिन अपने काम के लिए कुछ और समय चाहते हैं लेकिन ऐसा तो संभव नहीं है क्योंकि प्रकृति ने सभी को हर दिन 24 घंटे का ही समय ही उपलब्ध कराया है।

विशेषज्ञ की कलम से: विधि की पढ़ाई के बाद विविध संभावनाएं

विधि यानी ‘लॉ’ रोजगार सृजित करने वाले क्षेत्रों में पिछले कुछ सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है और इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं भी बनी हैं। इसमें पैसा, प्रतिष्ठा और सेवा भावना एक साथ सब निहित है। विधि पाठ्यक्रमों में प्रवेश दो स्तरों पर दिया जाता है।

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