कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल मामले में फैसले पर उनकी टिप्पणियों को लेकर जारी अवमानना नोटिस पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दाखिल किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने ‘चौकरीदार चोर है’ वाली टिप्पणी शीर्ष अदालत के हवाले से कहने पर एक बार फिर खेद व्यक्त किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने इसके साथ ही भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी द्वारा दायर आपराधिक अवमाना याचिका खारिज करने का अनुरोध किया। राहुल ने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
इससे पहले भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने राफेल मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर गांधी की टिप्पणी के बाद उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा दायर किया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष गांधी की ओर से पेश हुए एडवोकेट सुनील फर्नाडिस ने नोटिस पर जवाब दाखिल करने की अनुमति मांगी। पीठ ने इस संबंध में उन्हें जवाबी हलफनामा दायर करने की अनुमति दे दी है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने हलफनामे में कहा कि यह स्पष्ट है कि कोई भी अदालत कभी ऐसा नहीं करेगी। इसलिए न्यायालय के आदेश के बारे में दुर्भाग्यपूर्ण संदर्भ (इसके लिये मैं खेद प्रकट करता हूं) और राजनीतिक नारा राजनीतिक प्रचार के जोश में एक ही सांस में मिल गया। इसका यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए था कि अदालत ने इस मुद्दे पर कोई निष्कर्ष निकाला था। शीर्ष अदालत ने लेखी की आपराधिक अवमानना याचिका पर 23 अप्रैल को राहुल गांधी को नोटिस जारी किया था।
अदालत ने गांधी की टिप्पणी ‘चौकीदार चोर है’ को लेकर उनके खिलाफ 23 अप्रैल को आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया था। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 22 अप्रैल को ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान पर सुप्रीम कोर्ट में खेद प्रकट किया था।
राहुल गांधी ने अपने हलफनामे में कहा कि दूर-दूर तक न्यायालय को राजनीतिक परिदृश्य में लाने या जो न्यायालय ने कहा ही नहीं था, उसे उसका बताकर उसका अनादर करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी। गांधी ने कहा कि सरकार और सत्तारूढ़ दल के अनेक अंग लगातार कह रहे हैं कि पिछले साल 14 दिसंबर के फैसले में शीर्ष अदालत ने इस सौदे के विभिन्न पहलुओं पर सरकार को क्लीन चिट दी है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि राफेल का मुद्दा पिछले कई महीनों से देश के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों में सबसे ज्यादा प्रमुख रहा है लेकिन मामला न्यायालय के अधीन होने के बावजूद इस पर मीडिया और समाज में तीखी बहस छिड़ी हुयी है। शीर्ष अदालत ने पहले कहा था कि राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका पर 30 अप्रैल को सुनवाई की जाएगी।
(भाषा से इनपुट के साथ)

