श के 74 में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया के बाद देश जम्मू-कश्मीर में चुनाव के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने लद्दाख तथा जम्मू कश्मीर केंद्र शासित राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा हो रहे विकास कार्यों की भी चर्चा की।
सालभर पहले धारा 370 हटाए जाने का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने इस नयी यथास्थिति की जमकर तारीफ़ की। उन्होंने कहा, ‘‘ये एक साल वहां की महिलाओं को, दलितों को, मूलभूत अधिकारों को देने वाला कालखंड रहा है। ये हमारे शरणार्थियों को गरिमा पूर्ण जीवन जीने का भी एक साल रहा है।’’ आपको बता दें कि जम्मू कश्मीर के विलय के बाद से लागू धारा 370 के प्रावधानों की वजह से राज्य का अलग झंडा तथा अलग संविधान था। जिसके नागरिकता कानून में राज्य से बाहर शादी करने वाली महिला के बच्चों को राज्य की नागरिकता नहीं मिलने का प्रावधान था।
वहीं, राज्य में पंजाब से लाए गए वाल्मीकि समाज के लोगों को नियम बनाकर सिर्फ स्वच्छता कार्य को ही रोजगार के रूप में चुनने के लिए बाध्य कर दिया गया और इसके साथ ही उन्हें की नागरिकता से महरूम रखा गया। इसके अतिरिक्त देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को जम्मू कश्मीर राज्य की नागरिकता नहीं मिली थी।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा ‘‘जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की प्रक्रिया चल रही है। उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में इस पर काम चल रहा है और जल्दी से इसके पूरा होते ही भविष्य में वहां चुनाव हों, जम्मू-कश्मीर का विधायक हो, जम्मू-कश्मीर के मंत्रिगण हों, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री हों। नई ऊर्जा के साथ विकास के मार्ग पर आगे बढ़ें, इसके लिए देश प्रतिबद्ध भी है और प्रयासरत भी है।’’
5 अगस्त 2019 को राज्य के विभाजन से पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य में कुल 111 सीटें थीं। जिसमें से 24 पाक अधिकृत कश्मीर में आतीं हैं। इसलिए प्रभावी सीटों की संख्या 87 थी। जिसमें से 46 कश्मीर में, 37 जम्मू में और 4 लद्दाख क्षेत्र में आती थीं। आगे की योजना के तहत जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में 83 की बजाय 90 सीटें रखे जाने की बात चल रही है। इन बढ़ रही 7 सीटों में 5 जम्मू और 2 कश्मीर में होंगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती, लोकतंत्र की सच्ची ताकत हमारी चुनी हुई स्थानीय इकाइयों में हैं और यह गर्व की बात है कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय इकाइयों के जनप्रतिनिधि सक्रियता और संवेदनशीलता के साथ विकास के नए युग को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं उनके सभी पंच- सरपंचों को हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। विकास यात्रा में उनकी सक्रिय भागीदारी के लिए।’’ आयुष्मान योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसे बेहतरीन तरीके से आज जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के क्षेत्र में उपयोग किया जा रहा है।
वहीं लद्दाख के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि वहां के निवासियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हो चुकी है। लद्दाख की बहुत सारी विशेषताओं को सँभालने और सहेजने की आवश्यकता है। यह क्षेत्र कार्बन न्यूट्रल इकाई के रूप में अपनी पहचान बना सकता है।

