ग्रेटर नोएडा के अल्फा-2 सेक्टर में खराब पानी की वजह से अब तक करीब 70 लोग बीमार पड़ चुके हैं। आरोप है कि पेयजल में सीवेज का पानी मिल रहा है, जो क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के कारण हुआ है। यह समस्या तब सामने आई, जब 8 जनवरी को वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य सुभाष भाटी को पता चला कि चार किराएदार टाइफाइड से ग्रसित हैं।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में सुभाष भाटी ने कहा कि इंदौर जल त्रासदी के बाद लोग पहले से ही डरे हुए हैं। जैसे ही मामला सामने आया, सभी की मेडिकल रिपोर्ट की जांच करवाई गई। भाटी के मुताबिक, जिन चार छात्रों को टाइफाइड हुआ था, उनके आसपास के घरों से भी पेट दर्द और अन्य स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें सामने आने लगीं, जिससे चिंता और बढ़ गई।

अल्फा-2 सेक्टर में करीब 25 हजार लोग रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर सीवर लाइन ढकी नहीं है, जिसकी वजह से पानी बार-बार प्रदूषित हो रहा है। इलाके के निवासी दीपक नगर बताते हैं कि लगातार लोग बीमार पड़ रहे हैं और पूरे क्षेत्र में गंदे पानी की सप्लाई हो रही है।

अल्फा-2 में यह समस्या उस समय और गंभीर हो गई, जब पास के डेल्टा सेक्टर में भी लगभग 30 लोग बीमार पड़ गए। शिकायतों के बाद ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (GNIDA) ने एक लीकेज को ठीक कराया और अन्य इलाकों से पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे।

GNIDA के जनरल मैनेजर विनोद शर्मा ने बताया कि 8 जनवरी को अल्फा-2 से पानी के सैंपल लिए गए थे, जिन्हें जांच के लिए भेज दिया गया है। अगले सप्ताह तक रिपोर्ट आने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि जल आपूर्ति की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है।

अल्फा-2 आरडब्ल्यूए की जनरल सेक्रेटरी एन.पी. सिंह का दावा है कि इस समस्या को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है। बीते डेढ़ साल में कई मौकों पर खराब पानी की जानकारी दी गई, लेकिन पाइपलाइन को स्थायी रूप से ठीक नहीं किया गया।

इलाके की एक अन्य निवासी अनीता गौतम बताती हैं कि इंदौर त्रासदी से पहले भी यहां यही स्थिति थी। वह खुद बीमार पड़ी थीं और उनकी 19 वर्षीय बेटे को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उस समय कई छोटे बच्चों को भी इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया। उनके मुताबिक, लगभग हर हफ्ते पाइपलाइन में लीकेज हो जाती है। मजदूर आकर अस्थायी मरम्मत कर देते हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता।

इस मामले में जब GNIDA अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि पुरानी आयरन पाइपलाइन को बदलने का काम शुरू कर दिया गया है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में एक अधिकारी ने बताया कि हाल ही में गंगा जल की सप्लाई शुरू की गई है। पानी का बहाव तेज न होने की वजह से पुरानी पाइपलाइन में लीकेज की समस्या सामने आई है।

अधिकारी ने बताया कि पिछले हफ्ते अल्फा और डेल्टा सेक्टर में पांच पाइपलाइनों की मरम्मत की गई है। कुल 35 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन है, जिसे चरणबद्ध तरीके से ठीक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, इसलिए लोगों से धैर्य रखने की अपील की गई है।

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