वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रहे दिग्गज राजनेता जॉर्ज मैथ्यू फर्नांडिस नहीं रहे। मंगलवार को 88 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। वह अलजाइमर नामक बीमारी से पीड़ित थे। जॉर्ज 9 बार लोकसभा के सदस्य रहे। फर्नांडिस पहली बार 1967 में लोकसभा के लिए चुने गए। जॉर्ज ने बतौर केंद्रीय मंत्री कई बार अपनी सेवाएं दीं। उनके पास कम्युनिकेशन, उद्योग, रेलवे और रक्षा जैसे विभाग रहे। जॉर्ज इमर्जेंसी के दौरान गिरफ्तार भी हुए। जनता पार्टी द्वारा इंदिरा गांधी को शिकस्त देने के बाद बनी पहली गैर कांग्रेसी सरकार में जॉर्ज उद्योग मंत्री थे। फर्नांडिस इंदिरा गांधी के मुखर विरोधी थे। उन्होंने इंदिरा को एक बार ‘जन्मजात झूठी’ भी कहा था। इमर्जेंसी के दौरान जॉर्ज फर्नांडिस और कुछ अन्य पर डायनामाइट तस्करी का भी आरोप लगा। बड़ौदा डायनामाइट केस में उन पर आरोप लगा कि उन्होंने रेलवे पटरियों और सरकारी इमारतों को उड़ाने की योजना बनाई। वह जेल में थे जब उन्होंने 1977 आम चुनाव में मुजफ्फरपुर से जीत दर्ज की।
जॉर्ज एनडीए के सबसे पुराने सहयोगियों में से थे। उन्होंने 1998 और 1999 में बीजपी के साथ छोटे दलों को लाने में बड़ी भूमिका निभाई जब अटल बिहारी वाजपेयी एनडीए गठबंधन की ओर से पीएम थे। 1994 में जनता दल के टूटने के बाद बिहार के वर्तमान सीएम नीतीश कुमार के साथ फर्नांडिस ने समता पार्टी बनाई। पार्टी 1996 में बीजेपी की सहयोगी बनी। नीतीश ने जॉर्ज को महान नेता बताते हुए उनको श्रद्धांजलि दी है।
जॉर्ज का जन्म 3 जून 1930 को ब्रिटिश भारत में मंगलुरु में हुआ। जॉर्ज ने उस वक्त भी बहुत सुर्खियां बटोरीं जब उन्होंने कांग्रेसी दिग्गज नेता एसके पाटिल को उनके ही गढ़ मुंबई में 1967 लोकसभा चुनाव में शिकस्त दी। जॉर्ज ने समता पार्टी की स्थापना की और इमर्जेंसी के खिलाफ खड़े होने वाले बड़े नेता के तौर पर पहचान बनाई। आखिरी बार अगस्त 2009 से जुलाई 2010 के बीच राज्यसभा सांसद के तौर पर संसद के हिस्सा बने। जुलाई 2018 में बीजेपी के वेटरन नेता लालकृष्ण आडवाणी ने जॉर्ज को ‘रेबल लीडर’ या बागी नेता करार दिया और कहा कि देश की तरक्की के लिए ऐसे नेताओं की जरूरत है। आडवाणी ने कहा था कि अगर बागी नहीं होते तो देश को आजादी नहीं मिलती। जॉर्ज जैसे बागियों का लगातार आना जरूरी है ताकि देश विकास कर सके।

