दिल्ली में कोकीन की सबसे बड़ी खेप बरामद की गई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने 20 किलोग्राम कोकीन बरामद किया है। बरामद की गई कोकीन ग्रेड-A कोलंबियन कोकिन है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस कोकीन की कीमत 100 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई जा रही है। इस मामले में जांच अधिकारियों ने दिल्ली-एनसीआर से कुल 9 लोगों को पकड़ा है। पकड़े गए लोगों में एक महिला भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि कोकीन से जुड़े इस तस्करी की किंगपिन यह महिला ही है। जानकारी के मुताबिक करोड़ों की इस कोकीन को क्रिसमस और नये साल के जश्न के मौके पर खपाया जाना था। लेकिन पुलिस ने वक्त रहते कोकीन की इस खेप को बरामद कर लिया।
कोकीन की बरामदगी के दौरान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने जिन लोगों को पकड़ा है उनमें दो लोग नाइजीरिया के रहने वाले हैं जबकि एक युवक अमेरिका का रहने वाला बताया जा रहा है। एनसीबी निदेशक राकेश अस्थाना के नेतृत्व में यह खेप पकड़ी गई है। एनसीपी के निदेशक को ऑस्ट्रेलिया से इस खेप के बारे में गुप्त सूचना मिली थी जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है।
दरअसल ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने हाल ही में अपने देश में 55 किलो कोकीन बरामद किया था जिसकी जांच में खुलासा हुआ था कि इसके तार दिल्ली से जुड़े थे। एसके झा (डिप्टी, डायरेक्टर जनरल, NCB, नॉर्दन रीजन) ने बताया कि सूचना मिलने के बाद डिप्टी डायरेक्टर (ऑपरेशन), केपीएस मल्होत्रा की टीम ने 5 पुरुष तस्करों को एनसीआर के विभिन्न क्षेत्रों से पकड़ा। इसके अलावा इस मामले में एक महिला को वसंत कुंज स्थित एबियंस मॉल से भी पकड़ा गया है। पकड़ी गई महिला की पहचान मोनिका रेनहार्ट के तौर पर हुई है।
पकड़े गए पुरुषों में शामिल अकसिन्दर सिंह सोढ़ी भी शामिल है। इससे पहले वो एक ड्रग्स केस में भी शामिल था। अकसिन्दर सिंह सोढ़ी भारत में कोकीन इस तस्करी का बड़ा सरगना बताया जा रहा है। उसके अलावा योगश कुमार धुना, रामकेश सिंह, सामी वंश छाबरा कोकीन के ड्रिस्ट्रीब्यूटर बताए जा रहे हैं। मोनिका रेनहार्ट के बारे में पुलिस ने खुलासा किया है कि वो इस विंग की इंचार्ज थी। सोढ़ी ने पुलिसिया पूछताछ में यह भी खुलासा किया है कि कोकीन स्मगलरों के इस गैंग ने एक कंपनी रजिस्टर करवा रखी थी जिसके जरिए यह लोग विदेश से पैसों का लेनदेन किया करते थे।
इस गैंग का मास्टरमाइंड कनाडा में रहता है और मूल रूप से भारतीय है। इस शख्स का साउथ अमेरिका में कोकीन के डिलरों के साथ बड़ा नेटवर्क भी है। बताया जा रहा है कि इस गैंग ने गाजियाबाद में किराये पर मकान ले रखा था जहां यह कोकीन को छिपा कर रखते थे। सोढ़ी, ग्राहकों को मॉल या दूसरे अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कोकीन की सप्लाई किया करता था। किसी भी शख्स को कोकीन देने से पहले सोढ़ी खुद जाकर इलाके की रेकी भी किया करता था। एक दिलचस्प बात यह भी है कि इस गैंग के सदस्य एक-दूसरे का असली नाम नहीं जानते थे और कोकीन खरीदने वाले लोगों का नाम भी यह उजागर नहीं होने देते थे।

