Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर गंभीर सवाल उठाए। ममता बनर्जी ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट करने की यह प्रक्रिया सही तरीके से नहीं की जा रही है। इसमें कई नियमों का उल्लंघन, प्रशासनिक लापरवाही और अनियमितताएं हो रही हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को अव्यवस्थित, मनमाना और बिना ठोस योजना के किया गया बताया।

मुख्यमंत्री ने चिंता जताई कि इस प्रक्रिया की वजह से कई योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं, जिससे वे वोट देने के अधिकार से वंचित हो जाएंगे। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया।

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से मांग की कि इन खामियों को तुरंत दूर किया जाए और प्रक्रिया में सुधार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो एसआईआर की यह प्रक्रिया रोक दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर मौजूदा रूप में यह प्रक्रिया जारी रही, तो इससे भारी नुकसान होगा। बड़ी संख्या में लोगों का मताधिकार छीना जाएगा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीर चोट पहुंचेगी।

पिछले साल नवंबर में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इस प्रक्रिया को बिना योजना की, अव्यवस्थित और खतरनाक बताया था। ममता बनर्जी ने कहा था कि जलपाईगुड़ी में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समेत कई बूथ लेवल ऑफिसरों (बीएलओ) की मौत के बाद हालात बहुत गंभीर हो गए हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में ममता बनर्जी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर कई बार अपनी चिंता जता चुकी हैं, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, इसलिए उन्हें फिर से पत्र लिखना पड़ा।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने एसआईआर को अधिकारियों और आम लोगों पर जबरदस्ती लागू कर दिया, जो न सिर्फ अव्यवस्थित था बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा बन गया। उनके मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया से पहले ठोस तैयारी नहीं की गई, न ही साफ निर्देश दिए गए और न ही सही योजना बनाई गई।

ममता बनर्जी ने कहा कि अधिकारियों को ठीक से प्रशिक्षण नहीं दिया गया, जरूरी दस्तावेजों को लेकर भ्रम बना रहा, और बीएलओ के लिए अपने काम के समय में मतदाताओं से मिल पाना लगभग नामुमकिन हो गया। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता खतरे में पड़ गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि बीएलओ, जो पहले से शिक्षक या अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता हैं, उनसे उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमता से कहीं ज्यादा काम कराया जा रहा है।

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बनर्जी ने कहा कि सर्वर बार-बार खराब हो रहे हैं और डेटा में लगातार तकनीकी गड़बड़ियां आ रही हैं। इसकी वजह से अधिकतर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ऑनलाइन तरीके से मतदाता जानकारी अपलोड नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के कारण 4 दिसंबर की तय समय-सीमा तक सही और पूरा मतदाता डेटा अपलोड हो पाना लगभग नामुमकिन है।

टीएमसी चीफ ने यह भी बताया कि कार्रवाई के डर से कई बीएलओ मजबूरी में गलत जानकारियां अपलोड कर रहे हैं। इससे खतरा है कि असल और वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हट सकते हैं, यानी वे अपने वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

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