हुमांयू कबीर को टीएमसी ने निलंबित कर दिया है। टीएमसी द्वारा हुमांयू कबीर के खिलाफ लिए गए एक्शन को पार्टी के बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान ने सही बताया है। उन्होंने मुर्शिदाबाद में आयोजित रैली के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि दीदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वो समाज को समाज को विभाजित करने वालों को बर्दाश्त नहीं करेंगी।

उन्होंने कहा, “दीदी ने जो फैसला लिया है, दीदी ने साफ कर दिया कि जो लोग भी समाज को खराब करने की कोशिश करेंगे, समाज की विभाजित करने की कोशिश करेंगे, उनको दीदी बर्दाश्त नहीं करेंगी। दीदी और पार्टी ने वो स्टैंड स्पष्ट कर दिया है।”

फिरहाद हाकिम ने की निलंबन की घोषणा

तृणमूल के वरिष्ठ नेता फिरहाद हाकिम ने निलंबन की घोषणा करते हुए कहा कि कबीर सांप्रदायिक राजनीति में लिप्त हैं, जिसके टीएमसी सख्त खिलाफ है। खुद कोलकाता की एक मस्जिद के ‘मुतवल्ली’ हाकिम ने कहा कि कबीर जिस तरह से धार्मिक भावनाएं भड़का रहे हैं, वह एक जिम्मेदार राजनीतिक पार्टी के लिए स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, “कोई भी मस्जिद बना सकता है। लेकिन कोई सांप्रदायिक उकसावा नहीं होना चाहिए।”

ममता की रैली स्थल पर मौजूद थे हुमांयू कबीर, तभी आया निलंबन का आदेश

बहरामपुर जिला मुख्यालय में SIR के खिलाफ ममता बनर्जी की रैली से पहले कबीर के निलंबन की घोषणा की गई है। निलंबन की खबर फैलने से पहले तक खुद कबीर रैली स्थल पर मौजूद थे। कबीर ने प्रतिक्रिया मांगे जाने पर पत्रकारों से कहा कि निलंबन ‘जानबूझकर किया गया अपमान’ है।

ममता बनर्जी बोलीं- हम सांप्रदायिक राजनीति नहीं करते, हम इसके खिलाफ हैं।

रैली स्थल से जाते समय उन्होंने कहा कि वह विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर 22 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में नया राजनीतिक संगठन बनाएंगे। उन्होंने कहा, “मुझे कोई पत्र नहीं मिला है। लेकिन मैं शुक्रवार या सोमवार को विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दूंगा।” उन्होंने कहा कि वे छह दिसंबर को योजना के अनुसार आगे बढ़ेंगे, योजना रद्द नहीं करेंगे।

हाईकोर्ट में पीआईएल, कल हो सकती है सुनवाई

मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा क्षेत्र में बाबरी मस्जिद निर्माण के प्रस्ताव के खिलाफ कोलकाता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच में दायर की गई है।

याचिकाकर्ता का दावा है कि हमायूं कबीर द्वारा दिया गया यह प्रस्ताव भारतीय संविधान का उल्लंघन करता है और इससे सामाजिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी आधार पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है। सूत्रों के अनुसार, इस मामले की सुनवाई कल होने की संभावना है।

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